
PM Awas Yojana Scam: सतना में दान में मिल रहे पीएम आवास (फोटो सोर्स- pmay urban website)
Satna PM Awas Yojana Scam: मध्य प्रदेश के सतना शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के तहत बने मकानों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पीएम आवास योजना 1.0 के तहत जिन गरीब जरूरतमंदों को मकान आवंटित हुए थे, वे पैसों के लालच में कागजों पर दानवीर बनकर अपने आशियाने दूसरों को बेच रहे हैं। यह नियमों के विपरीत है। जानकारी के अनुसार कागजी गरीबों को मकानों की जरूरत ही नहीं है। इस खेल में एक गिरोह सक्रिय है, जो निगम की पीएम आवास शाखा से मिलीभगत कर वर्षों से मकानों की बिक्री कर रहे है।
इस खेल में दलाल गरीबों को निशाना बना रहे हैं। कई हितग्राही अपने हिस्से की 50 हजार रुपए से अधिक की प्रीमियम राशि जमा करने में असमर्थ हैं। ऐसे में दलाल उन्हें प्रीमियम राशि डूबने का डर दिखाकर या 50 हजार नकद का लालच देकर मकान बिकवा रहे हैं। दलालों द्वारा उतैली और कृपालपुर में एक दर्जन मकानों की खरीद-फरोख्त कराए जाने की बात सामने आई है। शहर में कई दलाल सक्रिय हैं, जो अब तक तीन दर्जन से अधिक मकानों की बिक्री करवा चुके हैं।
एक तरफ जहां फर्जीवाड़े के जरिए मकान बेचे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर असली जरूरतमंद दर-दर भटक रहे हैं। नगर निगम का करोड़ों रुपए का प्रीमियम बकाया है। 11 जनवरी 2023 से 20 फरवरी 2024 के बीच 123 हितग्राहियों द्वारा 25-25 हजार रुपए की प्रीमियम राशि जमा करने के बावजूद उन्हें अब तक मकान नहीं मिल पाया है, जबकि वे लगातार नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं।
नगर निगम के अफसरों की मानें तो पीएम आवास के मकान पूरी तरह नॉन ट्रांसफरेबल होते हैं। इन्हें किसी भी स्थिति में बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। यह आवास केवल पात्र और बेघर हितग्राहियों के स्वयं रहने के लिए आवंटित किए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई ऐसा कर रहा है, तो यह सीधा फर्जीवाड़ा है। पकड़े जाने पर आवास निरस्त करेंगे।
नगर निगम आयुक्त डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा ने बताया कि लॉटरी के हिसाब से पीएम आवास का अलॉटमेंट करते है। जिनकी मार्जिन मनी नहीं जमा है, उन्हें आखिरी नोटिस दिया है। यदि रकम नहीं देते है तो वेटिंग लिस्ट वालों को जारी कर देंगे। बिक्रीनामा सिविल कोर्ट का मामला है। हम विधिवत दे रहे हैं। इसमे निगम का कोई रोल नहीं है।
27 जुलाई 2026 को राजेंद्र नगर की सुशीला चौधरी ने कृपालपुर स्थित पीएम आवास मकान नंबर ई-21/303 को अर्चना नाम की महिला के नाम 50 रुपए के स्टांप पेपर पर दानपत्र के जरिए ट्रांसफर कर दिया। दानपत्र में यह लिखा कि मकान अर्चना के कब्जे में है। उसके दस्तावेज सौंप दिए गए हैं। भविष्य में कोई दखल नहीं रहेगा।
पत्रिका ने पीएम आवास बेचने का धंधा कर रहे एक दलाल से बातचीत की तो वह बेखौफ सवालों के जवाब देता रहा। दलाल के मोबाइल नंबर 94XXXXXX47 हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
सवाल- पीएम आवास की कैसे रजिस्ट्री होती है?
जवाब- दान-पत्र की नोटरी रजिस्ट्री हो जाती है।
सवाल- रजिस्ट्री का आधार क्या है?
जवाब-पानी बिल और बिजली के कनेक्शन से करा देते है।
सवाल- आप नगर निगम के कर्मचारी है?
जवाब- हां भाई।
सवाल-कितने महीने में आवास ट्रांसफर हो जाते है?
जवाब- नगर निगम के अधिकारी कहते है कि 11 महीने में हो जाता है।
सवाल- कितने लोगों को आप बिक्री कर चुके है?
जवाब- कई जान पहचाने के लोगों ने एक दर्जन आवास लिया है।
सवाल- कहीं हमारे साथ फर्जीवाड़ा तो नहीं हो रहा है?
जवाब- नहीं, लाइफटाइम कोई दिक्कत नहीं है।
सवाल- कोई रिस्क तो नहीं है?
जवाब- सब नगर निगम की गाइड लाइन में है। आप दिक्कत न मानें।
सवाल- किसके माध्यम से होता है और कौन पैसे लेता है?
जवाब- वार्ड के पार्षद से लेकर कई लोग हैं। खाते में पैसे लिए जाते हैं।
एएचपी घटक के मकानः 2662
ईडब्ल्यूएसः 2446
एलआईजीः 216
वेटिंग लिस्ट: 123, मार्जिन मनी न जमा करने वाले
हितग्राहीः 300 से अधिक
बीएलसी मकानः 4200
Updated on:
16 Oct 2026 09:36 am
Published on:
16 Oct 2026 09:21 am
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