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मध्यप्रदेश के कलेक्टरों से छीने निराश्रित निधि के अधिकार, शासन ने दिखाई सख्ती

जिले का खाता बंदकर राशि राज्यस्तरीय खाते में भेजने के निर्देश, कृषि उपज मंडियों को कहा गया सीधे राज्य खाते में जमा करें राशि
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सतना

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Suresh Mishra

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Updated: 27 Jul 2018, 3:27 PM IST

Social Justice Department of satna Madhya Pradesh

Social Justice Department of satna Madhya Pradesh

रमाशंकर शर्मा @ सतना। निराश्रितों और निर्धनों की मदद के लिए जिलास्तर पर किए गए निराश्रित निधि के प्रावधान को शासन ने समाप्त कर दिया है। अब इसके अधिकार कलेक्टरों से छीनते हुए जिलास्तर पर संचालित निराश्रित निधि के खाते को बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

साथ ही जिलास्तर पर संचालित निराश्रित निधि की संपूर्ण राशि को राज्यस्तर पर संधारित किए जा रहे खाते में स्थानांतरित करने कहा गया है। शासन के इस निर्णय से जिलास्तर पर स्पष्ट असंतोष देखा गया। साथ ही बताया जा रहा कि ऐसी स्थिति में जिले से जो आपात मदद तत्काल दी जा सकती थी वह संभव नहीं हो पाएगी। व्यवस्था को केन्द्रीकृत करने के भी आरोप लगने लगे हैं।

ये है मामला
सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग की अवर सचिव अलका श्रीवास्तव ने जारी आदेश में कलेक्टरों को बताया कि मप्र निराश्रित एवं निर्धन व्यक्तियों की सहायता नियम 2013 के नियम 20(2) के अधीन कृषि उपज मंडी और अन्य स्रोतों से संग्रहित की गई राशि जिलास्तर पर खोले गए खाते में जमा की जाती रही है। इससे अर्जित ब्याज से निराश्रितों और निर्धनों की मदद की जाती है।

खाते में स्थानान्तरित करने का निर्णय

इस खाते का संचालन कलेक्टर एवं सयुक्त संचालक अथवा उपसंचालक सामाजिक न्याय द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता रहा है। अब इन प्रावधानों में संशोधन कर दिया गया है। जिला स्तर पर संधारित निराश्रित निधि की राशि को राज्य स्तर पर संधारित राज्य निराश्रित निधि के खाते में स्थानान्तरित करने का निर्णय लिया गया है। वहां से जिलों की मांग एवं बजट के अनुरूप राज्य स्तर से आवंटित की जा सकेगी।

यह होगा नुकसान
अभी जिलास्तर पर मंडियों की आय की 5 प्रतिशत राशि निराश्रित निधि के लिए आती थी। जिसकी एफडी बना कर बैंक में जमा कर दी जाती थी। इसकी ब्याज से निराश्रितों और निर्धनों के लिए राशि खर्च की जाती थी। अब यह राशि जो सतना में लगभग 18 करोड़ है, राज्य स्तरीय खाते में जमा हो जाएगी। इसके बाद इसका एक पूल खाता हो जाएगा, जिससे सभी जिले अपनी आवश्यकतानुसार राशि ले सकेंगे। इससे सतना जैसे बड़े जिले जहां ज्यादा मंडियां है उनका नुकसान होगा और छोटे जिले और कम मंडियों वाले जिले यहां की राशि का उपयोग ज्यादा कर सकेंगे। इसके अलावा तात्कालिक मदद के मामले भी कलेक्टर स्तर पर त्वरित प्रभाव से संभव नहीं हो सकेंगे।

बड़ी साजिश का इशारा
जानकारों का कहना है, यह एक बड़ी साजिश है। राज्य शासन के पास पैसों की कमी हो गई है। पेंशन तक के लिए राशि नहीं है। इसलिए यह राशि पूल खाते में ली जा रही है। इससे शासन को एक मुश्त राशि मिल जाएगी। जिसका उपयोग वह अपने स्तर पर कर सकेगा। जबकि अभी यह राशि एफडी के रूप में सुरक्षित रहती थी। यह प्रदेश सरकार की कमजोर माली हालत का भी इशारा है।

एक सप्ताह का मौका
जिला स्तर पर संधारित खाते से निराश्रित निधि की पूरी राशि को राज्यस्तरीय खाते में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया कि जिलास्तर के खाते में मात्र इतनी राशि छोड़ी जाए जिससे खाता संचालित रहा आए। कलेक्टर और संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय को कहा गया है कि यह राशि तय राज्य स्तरीय खाते में एक सप्ताह में स्थानांतरित कर दी जाए।

पूरी राशि राज्य निराश्रित निधि के खाते में सीधे जमा

यह भी कहा गया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 से इस मद में कृषि उपज मंडियों से प्राप्त होने वाली पूरी राशि राज्य निराश्रित निधि के खाते में सीधे जमा करने कहा गया है। यह राशि जिले की मांग और बजट के अनुरूप निराश्रित निधि की राशि व्यय के लिए एमआइएस पोर्टल पर दर्ज प्रगति के आधार पर जिला स्तर पर संचालित खातों में संबंधित बैंक खाते में दी जाएगी।