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ये फल सेहत के लिए हैं निष्फल

गंगापुरसिटी. फलों के मामले में आम धारणा बनी हुई है कि वो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन इन दिनों बाजार में उपलब्ध फल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी नहीं होकर नुकसानदायी साबित हो सकते हैं। कारण, ये फल सेहत के लिए खतरनाक रासायनिक पदार्थों से पकाए जा रहे हैं।
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झांसी

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Abhishek Ojha

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Updated: 25 May 2017, 4:44 PM IST

गंगापुरसिटी. फलों के मामले में आम धारणा बनी हुई है कि वो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन इन दिनों बाजार में उपलब्ध फल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी नहीं होकर नुकसानदायी साबित हो सकते हैं। कारण, ये फल सेहत के लिए खतरनाक रासायनिक पदार्थों से पकाए जा रहे हैं। ठेलों व दुकानों पर सजे इन फलों को देखकर खाने को मन ललचाता है, लेकिन ऐसे फलों से सावधान रहने की जरूरत है। बाजार में उपलब्ध अधिकांश फल डालपक नहीं हैं, बल्कि इनको रसायनों से पकाया जा रहा है। कमोबेश ऐसी स्थिति सब्जियों की भी है। इनको काम में लेने से रासायानिक पदार्थ पेट में पहुंचता है और सेहत को बिगाड़ता है।

फलों को पकाने के लिए रासायनिक उपयोग में लेने का मापदंड तय है, लेकिन जल्दी के चक्कर में मापदंडों की अनदेखी करके रासायनिक तत्वों की अधिक मात्रा प्रयोग में ली जाती है। हालांकि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने एक अप्रेल से मिलावट के खिलाफ विशेष अभियान चलाया हुआ है। इस अभियान में अभी तक फल-सब्जी विक्रेताओं द्वारा सेहत से किए जा रहे खिलवाड़ की अनदेखी की गई है। अब तक अभियान में 40 नमूने संकलित किए गए, जिनमें फल-सब्जी का कोई नमूना नहीं है।

बीमारी का घर

सीजन के दौर में मांग के मुताबिक पूर्ति करने के लिए केला, आम, पपीता, अनार, चीकू, अंगूर व अन्य फलों को तीन से चार दिन तक कोल्ड स्टोरेज में भंडारण कर कार्बाइड से पकाया जाता है। केमिकल से पके हुए फल साधारण पके फलों की तुलना में ज्यादा चमकदार होते है। ऐसे में लोग इन्हें खरीदना पसंद करते हैं। चिकित्सकों के अनुसार अधिक मात्रा में केमिकल काम में लेकर पकाए गए फलों का लगातार सेवन कई बीमारियों का कारण बनता है। इससे कैंसर होने की आशंका रहती है। लीवर और आंतों में दिक्कतें होने से जी मचलाने, भूख नहीं लगने आदि शिकायतें होने लगती हैं। बिना धुले आम, चीकू, केले, अंगूर आदि खाने से दुष्प्रभाव अधिक होता है।

कीटनाशक का बढ़ता कारोबार

जिले में रासायनिक खेती के लगातार बढ़ते क्षेत्र में कीटनाशक का उपयोग भी बढ़ता जा रहा है। जिले में रासायनिक खेती का बोलबाला है। जबकि जैविक खेती के महज 20 कलस्टर है। जहां केवल तीन सौ हैक्टेयर क्षेत्रफल में ही जैविक खेती की जाती है। रसायनों के बढ़ते चलन के कारण जिले में कीटनाशक व फल-सब्जी फकाने के लिए केमिकल की 180 दुकानें संचालित हैं।

दो अधिकारियों पर जिले का भार

करीब 13 लाख की आबादी वाले सवाई माधोपुर जिले के लोगों की सेहत की सुरक्षा का भार मात्र दो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों पर है। ऐसे में ये अधिकारी मिलावट को लेकर पूरा जिला कवर नहीं कर पा रहे।

सब्जी में भी उपयोग

अधिक उत्पादन की लालसा में पिछले कुछ सालों से सब्जी उत्पादन में रसायनों का प्रयोग बढ़ा है। पहले खेतों में फिर गोदामों में भण्डारण के दौरान केमिकल काम में लिए जाते हैं। लौकी, तुरई तरबूज सहित विभिन्न सब्जियों में को जल्दी पकाने में इंजेक्शन का प्रचलन आम हो गया है।

ये सावधानी जरूरी

फल का छिलका उताकर देखे या चखें।

फल पर पाउडर लगा नहीं हो।

फल अधिक पका हुआ न हो।

खाने से पहले अच्छे से धुलाई करें।

कटे फल लेने से बचें।

फल सड़ा-गला न खरीदे।

फिलहाल, विशेष अभियान में शीतल पेय व अन्य खाद्य पदार्थो के नमूने लिए हंै। कार्यभार अधिक होने से केमिकल से पका कर बेचे जा रहे फलों के नमूने नहीं लिए है। जल्द ही फलों के नमूने संकलित कर दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वेदप्रकाश पूर्विया, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, सवाई माधोपुर