1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

लैब में तैयार हो रहा सस्ता और सुंदर सिंथेटिक हीरा

हीरे के अलावा मणिवाले पत्थरों का उत्पादन भी कर रहे हैं जो प्राकृतिक और मानव निर्मित पत्थरों जैसा दिखता है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Manish Kumar Singh

•

Updated: 15 Sep 2018, 1:15 PM IST

diamond, lab, britain, de beers, beautiful

लैब में तैयार हो रहा सस्ता और सुंदर सिंथेटिक हीरा

हीरा कोयले की खान से निकलता है लेकिन अब सस्ता और सुंदर हीरा ब्रिटेन की एक लैब में तैयार हो रहा है। डी बीयर्स कंपनी ने अभी अपना सिंथेटिक हीरे का पहला स्टोर भी नहीं खोला है लेकिन मानव निर्मित रत्नों के बाजार में इसकी मांग ने हीरा उद्योग में हलचल मचा दी है। एंग्लो अमरीकन कंपनी ने तीन महीने पहले कहा था कि वे लैब में तैयार हीरा सस्ती दर पर बेचेंगे। लैब में तैयार हीरा खान से निकले हीरे की तरह ही दिखता है। खदानों में तैयार हीरा कार्बन के शुद्ध कणों से तैयार होता है जिसमें वर्षों का समय लगता है। केमिकल से तैयार हीरा विशेष तरह के प्लाजमा बॉल में तैयार किया जाता है जिसमें करीब एक हफ्ते का समय लगता है। आधुनिक तकनीक से तैयार इस हीरे की पहचान के लिए विशेषज्ञों को खास मशीन की जरूरत पड़ेगी तभी इसकी पहचान संभव है। हीरे के अलावा मणिवाले पत्थरों का उत्पादन भी कर रहे हैं जो प्राकृतिक और मानव निर्मित पत्थरों जैसा दिखता है। लैब में तैयार हीरा युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है जिसके एक कैरट की कीमत 200 डॉलर (करीब 13000) रुपए है जो दूसरे रत्नों की तुलना में बेहद सस्ता है। जब से डी बीयर्स ने सिंथेटिक हीरा बनाने का ऐलान किया है तब से प्राकृतिक रूप से तैयार हीरे की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। इंडस्ट्री एनॉलिस्ट पॉल जिमनिस्की का मानना है कि इससे मानव निर्मित हीरे की कीमतों में भी 38 फीसदी से 24 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। इससे ये कयास लग रहे हैं कि कीमतों में इतनी गिरावट आने से खुदरा बाजार में इसकी कीमत और घटेगी जिससे इसकी पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक होगी। मानव निर्मित रत्न प्राकृतिक रत्नों को पीछे छोड़ देंगे। सिंथेटिक हीरे के बाजार में आने पर लंदन के हीरा व्यापारी एला ड्रेक का कहना है कि इस चुनौती को टक्कर देने के लिए वे भी कीमतों में कटौती करेंगे जिससे वे बाजार की प्रतिस्पर्धा में टिके रह सकें।