1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

ग्लोबल वार्मिंग से बेचैन मगरमच्छ बढ़ रहे हैं रिहायशी इलाकों की ओर, विशेषज्ञ जता रहे चिंता

ग्लोबल वार्मिंग के चलते मगरमच्छ के हमलों में हो सकती है वृद्धि ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञ ने किया खुलासा
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Priya Singh

•

Updated: 24 Jun 2019, 12:23 PM IST

Experts says Crocodile attacks can increase from Global Warming

ग्लोबल वार्मिंग से बेचैन मगरमच्छ बढ़ रहे हैं आबादी की ओर, विशेषज्ञ जता रहे चिंता

नई दिल्ली।ग्लोबल वार्मिंग ( global warming ) के चलते मगरमच्छ ( crocodile ) के हमलों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। एक ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ ने बीते इस बात का खुलासा किया है। एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया ( Australia ) के उत्तरी क्षेत्र में चार्ल्स डारविन विश्वविद्यालय में पर्यावरण और आजीविका अनुसंधान संस्थान के प्राणी शास्त्री एडम ब्रिटन ने कहा, "तापमान में वृद्धि के साथ ही मगरमच्छ ऐसे क्षेत्रों में चले जाएंगे जहां वे पहले कभी नहीं बसे थे।"

"ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार' गाता है ये समुद्री जानवर जानें कैसे

उन्होंने कहा कि आबादी के इस प्रसार का मतलब यह है कि अब ये सरीसृप उन लोगों के संपर्क में आएंगे जो पहले कभी इनके संपर्क में नहीं आए थे। ब्रिटन ने कहा, "जैसे-जैसे धरती गर्म हो रही है इसका मतलब यह है कि इसके प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में मगरमच्छ के हमलों में बढ़ोत्तरी होगी क्योंकि जैसे-जैसे यह गर्म होता जा रहा है, यह मगरमच्छों के फैलाव को बदलने जा रही है।"

अध्ययन में हुआ खुलासा, अगर नहीं लेते ऑफिस से छुट्टियां तो हो सकती है ये बीमारी

उन्होंने आगे कहा, "हम इंडोनेशिया ( Indonesia ) में देख रहे हैं कि मगरमच्छ उन जगहों पर जा रहे हैं जिन्हें या तो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा है या काफी लंबे समय से नहीं देखा है और इससे हमें हमलों के हादसे भी देखने को मिल रहे हैं।"

ब्रिटेन ने यह भी कहा, "अपने निवास स्थान के नुकसान के बाद मगरमच्छ इन स्थानों को स्थानांतरित हो जाएंगे और उन जगहों पर चले जाएंगे, जहां लोग उनके आदि नहीं हैं।" ब्रिटेन के मुताबिक, उत्तरी क्वींसलैंड के इलाकों में इन मगरमच्छों को देखा जा चुका है जिन्हें पहले शायद ही वहां देखा गया है।

इनपुट-आईएएनएस