
स्पेस साइंस: वैज्ञानिकों ने बनाया 'डस्टबस्टर' जो अंतरिक्ष यात्रियों को बचाएगा चांद की धूल-मिट्टी से
कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय (University of Colorado Boulder) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो किसी भी सतह पर मौजूद बारीक धूलकणों को इलेक्ट्रॉन बीम (Electrons Beam) का उपयोग कर साफ करता है। इसके लिए टीम ने नासा वैज्ञानिकों (NASA Scientists) के बनााए ऐसे ही एक अन्य उपकरण 'लूनर रेजोलिथ' (Lunar Regolith) की भी मदद ली है जो हल्के उर्जा कणों (Low Energy Particcales) की मदद से धूल (Dust) हटाने का काम करता है। इस नए प्रयोग में वैैज्ञानिकों ने एक हवा रहित खाली चैम्बर (Vaccume Chamber) में अंतरिक्ष के वातावरण का निर्माण (Space Environment) किया और स्पेससूट (Spacesuit) के कपड़े और कांच का उपयोग चांद की सतह पर उतरने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के उपकरणों के रूप में किया गया। इसके बाद शोधकर्ता डस्टबस्टर की मदद से कपड़े और कांच पर जमी धूल को हटाने में सफल रहे।
इसलिए जरूरी है धूलकण हटाना
प्रमुख शोधकर्ता बेंजामिन फर्र का कहना है कि दरअसल, चांद पर मौजूद धूलकण सूरज की तेज रोशनी और विकरण (Sun Radiation) से विद्युत कणों (Electrically Charged Particals) में बदल जाते हैं जो स्पेस सूट पर चिपकने पर उसके महत्त्वपूर्ण कलपुर्जों और संचार व्यवस्था (Communication Systems) को ठप कर सकते हैं। शोध के एक अन्य वैज्ञानिक झू वांग का कहना है कि डस्टबस्टर तकनीक सतह पर मौजूद 75 से 85 फीसदी धूलकणों को साफ करने में सक्षम है। चांद की सतह पर भी यह तकनीक काम कर सकती है जिससे अंतरिक्ष और चांद के वातावरण में मौजूद किसी भी अज्ञात बैक्टीरिया से अंतरिक्ष यात्रियों को बचाया जा सकेगा। फर्र का कहना है कि अभी भी इस पर काफी काम किया जाना बाकी है लेकिन शुरुआती निष्कर्ष बताते हैं कि इलेक्ट्रॉन-बीम डस्टबस्टर्स भविष्य में चांद पर जाने वाले यात्रियों के बहुत काम आएगा।
पहले भी बन चुके समस्या
गौरतलब है कि पूर्व में भी कई नासा और अन्य देशों के अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की धूल के उपकरणों और सूट के अहम संचार पुर्जों पर जमने और उनके खराब हो जाने या संपर्क टूट जाने जैसे शिकायतें की हैं। यह धूल इतनी बारी होती है कि बार-बार ब्रश से साफ करने के बाद भी नहीं हटती है। 1972 में अपोलो 17 (NASA's Lunar Mission Appolo 17) के चंद्र मिशन पर गए हैरिसन जैक श्मिट (Harrison Jack Shimit) को इससे भयानक एलर्जी हो गई। उन्होंने बताया कि इस धूल से चले हुए बारूद (Used Gun powder) जैसी गंध आती है।
Published on:
06 Sept 2020 11:14 am
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