
Sikar: मृतक पति-पत्नी (फोटो-पत्रिका)
सीकर। कुछ रिश्ते जिंदगी से भी ज्यादा गहरे होते हैं। सीकर के मावंडा क्षेत्र के ग्राम जांटाला में पति-पत्नी के बीच ऐसा ही अटूट साथ देखने को मिला, जिसकी अंतिम कहानी ने पूरे गांव को रुला दिया। पुष्कर सैनी (50) का मंगलवार रात करीब 3 बजे जयपुर के अस्पताल में निधन हो गया। परिवार के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी। बुधवार सुबह गमगीन माहौल में उनकी अंतिम यात्रा निकली और श्मशान में चिता सजाई गई।
पति की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि घर पर पत्नी कौशल्या देवी (47) पति के वियोग में बिलख रही थीं। अपनों के मुताबिक पति की मौत का गहरा सदमा वह सह नहीं सकीं। बुधवार रात करीब 2 बजे उन्होंने भी दम तोड़ दिया। यानी पति की मौत के महज 23 घंटे बाद पत्नी ने भी इस दुनिया से विदा ले ली।
गुरुवार को जांटाला के उसी श्मशान में कौशल्या देवी की चिता सजाई गई, जहां एक दिन पहले उनके पति पंचतत्व में विलीन हुए थे। पति-पत्नी को अंतिम विदाई देने उमड़े ग्रामीणों की आंखें नम थीं। गांव में शोक का ऐसा माहौल रहा कि बाजार बंद रहे और कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला।
पुष्कर और कौशल्या के पीछे उनके तीन बेटे लखन, विजय और रवि रह गए हैं। माता-पिता की मौत ने इन तीनों को अचानक ऐसी जिम्मेदारियों के सामने खड़ा कर दिया है, जिनके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। बड़ा बेटा लखन संविदा पर काम करता है, जबकि दोनों छोटे भाई अभी पढ़ाई कर रहे हैं।
एक के बाद एक माता-पिता की अर्थियां उठती देख बेटों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन्हें जिंदगी के मुश्किल दौर में माता-पिता का सहारा मिलना था, उनके सिर से महज एक दिन के भीतर मां और पिता दोनों का साया उठ गया।
परिवार की इस स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन और भामाशाहों से आगे आने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि तीनों भाइयों के सामने अब पढ़ाई, परवरिश और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट है। ऐसे में सरकारी सहायता के साथ समाज के सक्षम लोगों को भी इस परिवार का सहारा बनना चाहिए, ताकि माता-पिता को खो चुके तीनों बेटों का भविष्य अंधकार में न जाए।
Updated on:
27 Aug 2026 11:04 pm
Published on:
27 Aug 2026 11:00 pm
