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मास्टर प्लान पर भारी अवैध निर्माण, पढ़ें मरते शहरों को संजीवनी

ग्रीन बेल्ट पर जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण शहर के मास्टर प्लान पर अवैध निर्माण भारी पड़ रहा है। जिम्मेदार कोई कार्रवाई नहीं करते है। शहर से सटी नौ ग्राम पंचायत क्षेत्रों में 250 से अधिक कॉलोनी विकसित हो गई है।
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शहर के मास्टर प्लान पर अवैध निर्माण भारी पड़ रहा है। शहर के पेराफेरी क्षेत्र में लगातार बढ़ता अवैध निर्माण ग्रीन बेल्ट को खत्म कर रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदार ग्रीन बेल्ट को बचाने के लिए अवैध निर्माण पर हथौड़ा नहीं चला पा रहे हैं। शहरी सीमा से सटी नौ ग्राम पंचायत क्षेत्रों में 250 से अधिक आवासीय कॉलोनी विकसित हो गई। लेकिन जिम्मेदारों को मास्टर प्लान की फ्रिक नहीं की। मास्टर प्लान में जहां नए सुविधा क्षेत्र दर्शाए गए वहां भी आवासीय कॉलोनी विकसित हो गई। पिछले दिनों न्यायालय ने मास्टर प्लान की पालना को लेकर काफी सख्ती दिखाई थी। इसके बाद भी शहर में मास्टर प्लान की पालना को लेकर शहरी सरकार गंभीर नजर नहीं आ रही है।

पेड काटकर बसाई कॉलोनी

राजस्व विभाग के नियमानुसार किसान को खेत से पेड काटने की भी अनुमति लेनी होती है। लेकिन यहां तो कृषि भूमि बिना अनुमति के पेडों की बलि चढ़ा दी गई। इस कारण पेराफेरी इलाके में ग्रीन बेल्ट लगातार खत्म हो रही है। पिछले दिनों इस तरह की शिकायत भी दर्ज हुई थी। लेकिन लापरवाहों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।

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पहले सख्ती, अब फिर भूले

सीकर में अवैध कॉलोनियों को लेकर तीन वर्ष पहले जिला प्रशासन व नगर परिषद ने काफी सख्ताई दिखाई थी। इस दौरान ग्रीन बेल्ट में बसाए जा रहे एक आवासीय प्रोजेक्ट के गेट को ध्वस्त कर दिया गया। 150 से अधिक कॉलोनाईजर्स को नोटिस दिया गया। लेकिन कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के तबादला होते ही मामला फाइलों में दफन हो गया।

सड़क किनारे बनते गए व्यावसायिक कॉम्पलैक्स

पिछले मास्टर प्लान की समीक्षा में माना गया कि सीकर में बढ़ती यातायात जाम की सस्या का कारण अनियोजित विकास है। इसके बाद भी शहर के बाईपास क्षेत्र में व्यावसायिक कॉम्पलैक्स बन गए। इस कारण भी भविष्य में शहरवासियों की मुसीबत बढ़ सकती है।

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