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सीतापुर का ऐसा गांव जहां लोग फ्रिज को कपड़े की अलमारी और कूलर को टेबल के रूप में करते है प्रयोग

आजदी के बाद से अब तक बिजली की रोशनी से अछूता है गांव
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सीतापुर

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Ruchi Sharma

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Updated: 3 Jun 2018, 11:59 AM IST

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सीतापुर का ऐसा गांव जहां लोग फ्रिज को कपड़े की अलमारी और कूलर को टेबल के रूप में करते है प्रयोग

सीतापुर. भीषण गर्मी में हम फ्रिज में पीने के लिए ठंडा पानी और गर्म हवाओं से बचने के लिए हम कूलर का इस्तेमाल करते है, लेकिन सीतापुर में एक ऐसा गांव स्थित है जहां लोग फ्रिज में अपनी जरूरत के कपड़े और कूलर को टेबल के रूप में इस्तेमाल करते है। जी हां यह आपको सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लग रहा होगा लेकिन यह सीतापुर के एक गांव की जमीनी हकीकत हैं। यहां ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां आजदी के बाद से अब तक इन ग्रामवासियों ने बिजली का मुहं तक नहीं देखा है। ग्राम वाशियों के पास मौजूद बिजली के उपकरण अब उनके कपड़े रखने और रोजमर्रा के चीजों में इस्तेमाल किये जाते है। ग्रामवासी पिछले कई दशकों से अपने गांव में बिजली आने का इंतजार कर रहे है लेकिन समय बीतता गया और उनकी यह आशा आज तक कोई भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी पूरा न कर सका है।

फ्रिज को कपड़े की अलमारी और कूलर बना टेबल

यह चौका देने वाला वाक्य पिसावां थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत महमदापुर के मजरा तालगांव का है। यहां आजदी के बाद से आज तक लोग बिजली का इंतजार आज भी कर रहे है लेकिन इन ग्राम वासियों के सपना आज भी सपना ही रहा गया है। आपको ऐसे दृश्य बहुत ही कम ही दिखाई दिए होंगे जहां पर लोग फ्रिज में कपड़े और कूलर और बिजली के आदि उपकरण अन्य चीजों में इस्तेमाल करते होंगे लेकिन आज आपको बताते है एक गांव की कहानी जहां लोग हकीकत में ऐसा करते है।

दहेज या अन्य तरीकों से एकत्रित किये गए बिजली के उपकरण गांव वालों के लिए आज भी कूड़े के समान है क्योंकि गांव में बिजली न पहुंचने से ये उपकरण बेकार हो चुके है या वह अन्य रूप में इस्तेमाल किये जा रहे है। गांव वासियों के कहना हैं कि चुनाव के वक़्त सभी पार्टी के जनप्रतिनिधि आते और वोट के नाम पर गांव में बिजली लाने का वायदा तो जरूर करते है लेकिन चुनाव के बाद कोई भी प्रतिनिधि गांव की तरफ नजर उठा के नहीं देखता है। इसी उदासीनता के चलते ग्रामीणों ने कई बार डीएम,सांसद व विधायकों से भी स्वयं जाकर इसकी गुजार लगाई लेकिन किसी ने भी उनकी जरूरत को आवश्यक नही समझा और गांव आज भी बिजली के पानी अंधेरे में है।

ग्राम प्रधान सुधा मिश्रा का कहना है कि वह इसके लिए कई बार पार्टी के जनप्रतिनिधियों से जाकर मुलाकात की और समस्या से अवगत कराया लेकिन उनकी इस समस्या के समाधान के लिए आज तक कोई भी आगे नहीं आया और बिजली के अभाव में आज गांव के लोग अंधेरे में अपनी ज़िंदगी गुजारने को मजबूर है।

गांव के नौजवानों के सामने आ रही शादी की दिक्कत

आजदी के बाद से अब तक गांव में बिजली न पहुंचने से अब गांव के नौजवानों के सामने शादी की दिक्कत आ रही है। गांव के नौजवान अनुपम व संदीप का कहना है कि लोग अपनी बेटियों के रिश्ते लेकर तो जरूर आते है लेकिन यहां बिजली न होने की बात सुनकर वह बगैर रिश्ता किये ही वापस लौट जाते है। उनका कहना है कि जैसे तैसे पहले अगर किसी की शादी हो भी चुकी तो उसकी पत्नी एक बार यहां आने के बाद अपने मायके जाती है और वापस लौटकर नहीं आती है। जिसके चलते आज गांव वालों अपने बेटों की शादियों के भी चिंतित हो रहे है और बिजली आने का इंतजार आज भी कर रहे है।


प्रशासन की उदासीनता से बिजली से वंचित है गांव

पीएम मोदी ने सरकार में आते ही गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने के लिए सौभाग्य योजना का शुभारम्भ किया था। जिसके तहत सभी गांवों को बिजली से जोड़ने और गरीबों के घर रोशनी से जगमगाने की बात कही गयी थी। लेकिन पीएम के इस सपने को सीतापुर के जिला प्रशासन ने मिट्टी में मिला दिया। बिजली विभाग के आलाधिकारियों का कहना है कि पीएम ने 2018 तक सभी गांव को सौभाग्य योजना के तहत जोड़ने का लक्ष्य रखा था लेकिन इस गांव की उन्हें जानकारी नहीं थी अब जानकारी हो गयी और इन गांव की फ़ाइल को बनाकर आगे बढ़ाने का काम किया जाएगा। हालांकि अधिकारी समय पढ़ने पर बयान तो अच्छा देते है लेकिन इनकी बातों पे यदि गौर किया जाते तो क्या आज तक उन्हें गांव वालों द्वारा की गई शिकायतें प्राप्त नहीं हुयी। लिहाजा अब देखना यह है कि इस गांव में कब तक बिजली पहुंचाने का कार्य बिजली विभाग करता है।