
सोनभद्र में सर्पदंश बना बड़ा खतरा। फोटो सोर्स-Ai
Sonbhadra News: मानसून की दस्तक के साथ जिले में सर्पदंश की घटनाओं में तेजी आने लगी है। पिछले 3 सालों के आंकड़े बताते हैं कि सोनभद्र जिले में सांप के काटने से 199 लोगों की मौत हो चुकी है। सर्पदंश के मामलों में हर साल मानसून के दौरान बढ़ोतरी देखने को मिलती है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में 69 लोगों, वर्ष 2024-25 में 62 लोगों और वर्ष 2025-26 में 68 लोगों की मौत सर्पदंश के कारण हुई।
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचने की बजाय झाड़-फूंकका सहारा लिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही कई मामलों में मौत का प्रमुख कारण बनता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों से अस्पतालों की दूरी अधिक होने और कई जगहों पर सड़क व परिवहन की खराब व्यवस्था के कारण लोग मजबूरी में पहले झाड़-फूंक कराने पहुंच जाते हैं, जिससे उपचार में देरी हो जाती है।
सोनभद्र प्रदेश का सबसे अधिक वन क्षेत्र वाला जिला माना जाता है। यहां के जंगलों में दुनिया के सबसे खतरनाक सांपों में शामिल कोबरा, रसेल वाइपर और करैत बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। यही वजह है कि जिले में सर्पदंश की घटनाएं अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक होती हैं।
जिला प्रशासन के मुताबिक ये आंकड़े केवल उन मामलों के हैं, जिनमें पोस्टमार्टम के बाद मृतकों के आश्रितों को आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता प्रदान की गई। कई मामलों में परिजन पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर देते हैं, जिससे वास्तविक संख्या इससे अधिक होने की आशंका भी जताई जाती है।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और अन्य प्रमुख अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया गया है, ताकि सर्पदंश के मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान, जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि लोगों को सर्पदंश से बचाव और समय पर उपचार के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर कोटेदार, एएनएम, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों के माध्यम से पोस्टर लगाकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को झाड़-फूंक जैसी परंपरागत मान्यताओं से दूर रहकर सीधे नजदीकी अस्पताल पहुंचने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश मिश्रा ने बताया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही आशा, एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सर्पदंश की स्थिति में लोग झाड़-फूंक की बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचकर इलाज कराएं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि पीड़ित को समय रहते अस्पताल पहुंचाकर एंटी स्नेक वेनम दिया जाए तो अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है। इसलिए किसी भी स्थिति में झाड़-फूंक के भरोसे रहने की बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
Updated on:
13 Jun 2026 02:34 pm
Published on:
13 Jun 2026 02:21 pm
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