
इस टीचर को आप भी करेंगे सलाम, शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए दौड़ा दी दुरावल एक्सप्रेस
सोनभद्र. सरकारी स्कूलों के कुछ शिक्षकों ने व्यवस्था में सुधार के लिए ऐसी मिसाल पेश की है जिन्हें जानने के बाद आप भी उन्हें सलाम करेंगे। राबट्सगंज जिला मुख्यालय से लगभग १५ किलोमीटर दूर दुरावल खुर्द का प्राथमिक विद्यालय अब अन्य लोगों के लिए मॉडल बन गया है। शिक्षक ने बच्चों को पढ़ाई के प्रति आकर्षित करने के लिए ही स्कूल में ऐसी दुरावल एक्सप्रेस चलायी कि वह चर्चा का ही विषय बन गयी है। शिक्षक का सपना पूरा हो गया है और अब दुरावल एक्सप्रेस बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रही है।
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हम किसी चलने वाली दुरावल एक्सप्रेस की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि स्कूलों के कमरो को ही ट्रेन का रुप दिये गये भवन की बात कर रहे हैं। स्कूल के प्रधानाध्यापक राजकुमार सिंह ने बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसा ही अनोखा प्रयोग किया है। राजकुमार सिंह ने स्कूल के भवन को ट्रेन के डिब्बे का रुप दे दिया है और कोच की तरह डिब्बे का नाम एस वन, एस टू रखा गया है। जिस तरह से ट्रेन की डिब्बे में चढऩे के लिए सीढ़ी होती है उसी तरह स्कूल में बने दुरावल एक्सप्रेस के कमरों में जाने के लिए भी सीढ़ी चढऩी होती है। स्कूल का भवन इतना अद्भृत है कि दूर से ही सबको स्कूल दिख जाता है। प्रधानाध्यापक राजकुमार सिंह के दुरावल एक्सप्रेस वाले स्कूल में अन्य सरकारी शिक्षण संस्थानों की तरह ही पढ़ाई होती है।
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सरकार से मिली कम मदद, अपने वेतन से किया स्कूल का कायाकल्प
प्रधानाध्यापक राजकुमार सिंह ने स्कूल का कायाकल्प करने के लिए शासन से सहयोग मांगा था लेकिन आशा के अनुसार सहयोग नहीं मिल पाया। इसके बाद राजकुमार ने अन्य लोगों ने आर्थिक मदद लेने की जगह अपना वेतन लगाया। प्रधानध्यापक की मेहनत रंग लायी और दुरावल एक्सप्रेस अब मॉडल स्कूल बन गया है।
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स्कूल में शिक्षा की गुणवत्ता पर रखा जाता है विशेष ध्यान
प्रधानध्यापक राजकुमार सिंह स्कूल में बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देते हैं। दुरावल एक्सप्रेस के सामने क्वॉलिटी एक्सप्रेस भी लिखा गया है। इससे साफ हो जाता है कि शिक्षा की गुणवत्ता पर किसी तरह का समझौता नहीं किया गया है। आमतौर पर खुर्द जैसी जगहो पर पढ़ाने के लिए शिक्षक अपनी तैनाती नहीं कराना चाहते हैं, लेकिन राजकुमार सिंह की सोच इससे बिल्कुल अलग है। वर्ष २०११ में राजकुमार सिंह की यहां पर तैनाती हुई थी। इस समय स्कूल में बच्चों की संख्या ८० थी। राजकुमार सिंह ने सरकारी स्कूल में नही पढ़ाने वाले अभिभावकों से सम्पर्क किया तो पता चला कि सुविधा नहीं होने के चलते वह अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रहे हैं। इसके बाद ही राजकुमार सिंह ने मॉडल स्कूल बनाने को जो सपना देखा उसे अपने बल पर पूरा किया। आज स्कूल में छात्रों की संख्या पहले से अधिक हो चुकी है। प्राइवेट स्कूल छोड़ कर बच्चे यहां पर आ रहे हैं। राजकुमार सिंह ने कहा कि अभी और सुधार की गुंजाइश है जल्द ही यहां पर अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई भी आरंभ करायी जायेगी। उन्होंने कहा कि खुद पर विश्वास हो तो व्यवस्था में भी परिवर्तन हो सकता है।
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Published on:
18 Nov 2017, 8:02 PM IST
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