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Abha Card Update : अब नहीं रखनी पड़ेगी मरीज की पुरानी रिपोर्ट्स, इस आईडी से एक क्लिक पर मिलेगा पूरा डेटा

Abha Card Update : अब हर व्यक्ति का हेल्थ अकाउंट बनाया जाएगा, जिसमें डिजिटल रूप में व्यक्ति का स्वास्थ्य रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। इससे व्यक्ति को अनावश्यक कागजात का रिकार्ड नहीं रखना पड़ेगा।

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Abha Card Update : अब हर व्यक्ति का हेल्थ अकाउंट बनाया जाएगा, जिसमें डिजिटल रूप में व्यक्ति का स्वास्थ्य रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। इससे व्यक्ति को अनावश्यक कागजात का रिकार्ड नहीं रखना पड़ेगा। इसमें डॉक्टर्स को रिपोर्ट दिखाने से लेकर रिपोर्ट अपलोड कर सकते हैं। इसे एक क्लिक पर डाउनलोड किया जा सकता है।

सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि केन्द्र सरकार ने आयुष्मान डिजिटल भारत मिशन की शुरूआत की है। इसके लिए मरीज का हैल्थ रिकॉर्ड ऑनलाइन अपडेट रखने के लिए आयुष्मान भारत अकाउंट (आभा) बनाया जा रहा है। यह आईडी बनाने पर 14 अंकों का एक अकाउंट नम्बर अलॉट होगा, जिसमें संबंधित व्यक्ति ऐप के माध्यम से अपने चिकित्सा से संबंधित रिकॉर्ड, लैब रिपोर्ट, डॉक्टर का लिखा दवा का पर्चा, डॉक्टर नोटस, इमेज, वैक्सीन इत्यादि डिजिटल प्लेटफार्म पर सुरक्षित रख सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग के कार्मिक आभा आईडी बना रहे हैं।

लाभार्थी स्वयं भी अपनी आभा आईडी बना सकता है। यह अकाउंट मोबाइल में भी आराम से जनरेट हो जाएगा। इसके लिए व्यक्ति मोबाइल में प्ले स्टोर पर जाना होगा। वहां से इसे डाउनलोड कर सकते हैं।

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किस फंक्शन में क्या
- लैब रिपोर्ट्स : इसमें संबंधित व्यक्ति लैब का नाम, रिपोर्ट की स्थिति और स्थिति या बीमारी का रिकॉर्ड रख सकता है।
- डॉक्टर्स की दवा का पर्चा : इसमें डॉक्टर्स और हॉस्पिटल का पर्चा रख सकते हैं। डॉक्टर्स या हॉस्पिटल का नाम और उनसे मिलने का समय का रिकॉर्ड शामिल है।
- डॉक्टर्स नोट्स : डॉक्टर्स और अस्पताल ने संबंधित मरीज की जांच कर क्या लिखा है।
- इमेज: इसमें एक्सरे, एमआरआई, सीटी स्कैन समेत अन्य जांचें रिपोर्ट अपलोड कर सकते हैं।
- वैक्सीनेशन : यहां वैक्सीनेशन का रिकार्ड रख सकते हैं।
- मेडिकल खर्च : उपचार में कितना खर्चा, उसकी राशि, पेमेंट मोड और उसकी रसीद शामिल है।

नहीं रखनी होगी पुरानी रिपोर्ट
हेल्थ अकाउंट बनाने से उसमें रिकॉर्ड का संधारण करने का फायदा मिलेगा। अक्सर मरीज डॉक्टर के पास पहुंचता है तो उससे बीमारी के बारे में जानकारी ली जाती है। चिकित्सक रोगी से पूर्व की जांच रिपोर्ट मांगता है। कई बार रिकॉर्ड नहीं होने से दिक्कत आती है। ऐसे दुबारा में सारी रिपोर्ट आने के बाद उपचार में शुरू होता है। पुराना रिकॉर्ड रहे, तो डॉक्टर को बीमारी तलाशने में बड़ी मदद मिलती है।

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