15 अगस्त का दिन भारत के लिए अविस्मरणीय है। इसी दिन भारत ने मध्यकालीन और ब्रिटिश गुलामी की जंजीरें तोड़ एक नए युग में कदम रखा था। परन्तु क्या आप जानते हैं कि इस दिन से भारत की और भी कई यादें जुड़ी हुई हैं। आइए देखें कि भारत की आजादी से जुड़ा 15 अगस्त किस तरह हमारे इतिहास में रचा बसा है।
15 अगस्त 1945: गुलाम भारत को आजादी मिली और भारत ने कॉमनवेल्थ ऑफ नेशन्स की सदस्यता ली।
15 अगस्त 1778: भारतीय क्रांतिकारी और रानी चेनम्मा के वीर सिपाही संगोली रायन्ना का जन्म हुआ। वह आजीवन अपने वतन की मिट्टी की आजादी के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी से लड़ते रहे। एक गद्दार द्वारा सूचना दिए जाने पर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर अप्रैल 1830 में सजा-ए-मौत दे दी।
15 अगस्त 1872: प्रख्यात भारतीय फिलोसफर तथा धर्मगुरू श्री अरविन्दो को जन्म हुआ। उन्होंने पश्चिमी जगत को प्राचीन भारतीय योग विद्या से परिचित कराया। उनकी मृत्यु 5 दिसम्बर 1950 को पांडिचेरी में हुई।
15 अगस्त 1873: भारतीय पुरातत्वविद और इतिहासकार रामचन्दर चंदा का जन्म हुआ। आधुनिक बंगाल का इतिहास लिखने में उनकी भूमिका सराही जाती है। उनकी मृत्यु 28 मई 1942 को हुई।
15 अगस्त 1912: भारतीय शास्त्रीय संगीतकार अमीर खान का जन्म हुआ। वह भारतीय संगीतकारों की पहली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते थे जिनके म्यूजिक रिकॉर्ड रिलीज किए गए। उनकी मृत्यु 13 फरवरी 1974 को हुई।
15 अगस्त 1938: "चाचा चौधरी", "पिंकी और रमन" जैसे कॉमिक किरदार रचने वाले भारत के पहले और मशहूर कार्टूनकार प्राण कुमार शर्मा का जन्म हुआ। उन्होंने न केवल भारत को स्वदेशी कॉमिक किरदार दिए बल्कि कॉमिक विधा को वर्तमान बुलंदियों तक पहुंचाया। उनकी मृत्यु हाल ही में 5 अगस्त 2014 को हुई है।
15 अगस्त 1947: यह एक संयोग ही है कि ठीक भारत की स्वतंत्रता वाले दिन ही बॉलीवुड कलाकार राखी का जन्म हुआ। हिन्दी सिनेमा का संजीदा और बेहतरीन अभिनेत्रियों में एक राखी को फिल्म कभी-कभी, त्रिशूल, लेकिन, करण अर्जुन जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है।
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15 अगस्त 1961: भारतीय सिनेमा में स्क्रीनराइटिंग का महिला पर्याय बन चुकी सुहासिनी मणिरत्नम का जन्म भी 15 अगस्त को ही हुआ।
15 अगस्त 2005: भारत में त्वचा रोग संबंधी चिकित्सा कोर्सेज तथा सेवाओं की स्थापना करने का श्रेय बेंदापुडी वेंकट सत्यनारायण को दिया जाता है। वह भारत के पहले डर्मेटोलोजिस्ट थे, साथ ही उन्होंने भारत में त्वचा रोग विज्ञान की नींव रखी थी। 30 जनवरी 1927 को जन्मे बेंदापुड़ी की मृत्यु 15 अगस्त 2005 को हुई।