उन्होंने बताया कि डीपीआर तैयार करने के लिए भूवन पोर्टल के से उस ग्राम पंचायत के नक्शें, विवरण जैसे ग्राउण्ट वाटर, कैनाल डिस्ट्रीब्यूशन, सॉल्ट क्षेत्र, मारफोलोजी के विरण की कॉपी तैयार कर डीपीआर में शामिल करनी होगी। इस भूवन पोर्टल और गूगल अर्थ प्रो से किसी भी कार्य की लम्बाई, क्षेत्रफल और मिट्टी की मात्रा निकालने के लिए पूरी रिपोर्ट बन सकेगी। मनरेगा के एक्सईएन प्रेम अग्रवाल ने जयपुर में प्रशिक्षण के दौरान ली गई जानकारियों को भी सांझा किया। उन्होंने तकनीकी अधिकारियों को अपडेट रहकर पूरे ग्रामीण क्षेत्र का नक्शा बनाने और फिर उसके आधार पर कार्यो की डीपीआर बनाने की बात कही।