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कानून का खौफ नहीं, क्योंकि पालना करवाता नहीं कोई

सड़क सुरक्षा सप्ताह में भी याद नहीं आता जिम्मेदारों को कानून
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श्री गंगानगर

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pawan uppal

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Updated: 1 May 2018, 7:16 AM IST

traffic roles follow

श्रीगंगानगर.

वाहन चलाते समय मोबाइल फोन से बातें करना प्रतिबंधित है। मोटर व्हीकल एक्ट में इसके लिए जुर्माने का प्रावधान है, वहीं राजस्थान उच्च न्यायालय ने ड्राइविंग लाइसेंस तक रद्द करने की व्यवस्था दी है। इसके बावजूद शहर में और शहर से बाहर राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों पर चालक धड़ल्ले से और बेखौफ मोबाइल पर बातें करते हुए वाहन दौड़ाते हैं। ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ न तो यातायात पुलिस कार्रवाई करती और न ही परिवहन विभाग।


हाल ही उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूल वैन के ट्रेन से टकराने की घटना की जांच में यह बात सामने आइ्र है कि वैन चालक ईयर फोन लगाकर मोबाइल से बात कर रहा था। इस हादसे में 13 मासूम बच्चों की मौत हुई थी।


चार गुणा बढ़ जाता है दुर्घटना का खतरा
वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग के संबंध में आईआईटी मुम्बई सहित अन्य संस्थाओं की ओर से किए गए अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसके अनुसार वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग से दुर्घटना का खतरा चार गुना बढ़ जाता है। हमारे देश में वाहन चलाते समय दस में से तीन चालक मोबाइल पर बात करते हैं, जिससे उनका ध्यान बंटता है और वाहन कभी भी दुर्घटना का शिकार हो सकता है। अध्ययन में बताया गया है कि उत्तर भारत में 62 प्रतिशत लोग वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं जबकि दक्षिण भारत में ऐसे चालक 52 प्रतिशत हैं।


मोबाइल पर कार्रवाई नहीं
वाहन चलाते समय मोबाइल के उपयोग पर जुर्माने और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान है। इसके बावजूद श्रीगंगानगर जिले में पुलिस ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने से परहेज कर रही है। आमतौर पर पुलिस क्षमता से ज्यादा सवारी बैठाने, सीट बैल्ट नहीं लगाने, वाहन का बीमा नहीं होने, कागजात पूरे नहीं होने आदि मामलों में ही चालान कर मोटर व्हीकल एक्ट और सड़क सुरक्षा की औपचारिकता पूरी करती है। इस मामले में परिवहन विभाग से तो सड़क सुरक्षा की अपेक्षा रखनी ही व्यर्थ है। वर्तमान में चल रहे सड़क सुरक्षा सप्ताह में भी पुलिस ने वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ एक भी कार्रवाई नहीं की है।


सड़क से ध्यान हटते ही होती है दुर्घटना
मोबाइल पर बात करते समय चालक का ध्यान सड़क से हटता है। ऐसे में दुर्घटना होती है तो सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए चल रहे वाहन में सवार लोगों को बिना वजह उसकी गलती का फल भुगतना पड़ता है।


मोबाइल और न्यायपालिका
वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग से हुई दुर्घटनाओं को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि अगर कोई वाहन चालक मोबाइल फोन पर बात करते हुए पकड़ा जाए तो उस पर 500 रुपए जुर्माना लगाने के साथ ड्राइविंग लाइसेंस तीन माह के लिए निरस्त कर दिया जाए।


राजस्थान उच्च न्यायालय ने हाल ही अपने आदेश में राज्य सरकार, यातायात पुलिस व परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि अगर कोई व्यक्ति वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता पाया जाए तो उसके फोटो तथा वाहन और चालक के अन्य साक्ष्य लेकर संबंधित आरटीओ को लाइसेंस निरस्त करने के लिए भेजे जाएं।

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