
India Vs Pakistan: श्रीगंगानगर जिले में सरहरी इलाकों में सीमा पार से बॉर्डर पास पाकिस्तानी ड्रोन आने की सूचना के बाद श्रीगंगानगर जिले में रेड अलर्ट घोषित कर ब्लैक आउट किया गया है। जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बताया कि पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन आने की सूचना मिलते ही पूरे जिले में रेड अलर्ट घोषित किया गया है। विद्युत आपूर्ति बंद करने के साथ ही खतरा टलने तक ब्लैक आउट किया गया है। उन्होंने बताया कि ड्रोन हमले की आशंका के चलते सेना और वायु सेना सतर्क है।
वहीं बीएसएफ को गश्त के दौरान घड़साना इलाके में एक खिलौनानुमा ड्रोन मिला है। बीएसएफ व पुलिस ड्रोन को लेकर थाने में पहुंचे। जानकारी के अनुसार, घड़साना क्षेत्र के गांव 2 डीडी में एक ड्रोन मिलने की सूचना पर सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी एवं पुलिस मौके पर पहुंची। कस्बा हल्का पटवारी ओमप्रकाश ने बताया कि 2 डीडी गांव के निकट एक ड्रोन मिला है। पुलिस ने ड्रोन के बारे में कुछ भी बताने से इनकार किया है।
जिला कलक्टर ने बताया कि रात को ब्लैक आउट और रेड अलर्ट के दौरान शहर में लाइट चलाकर वाहन चलते मिले। ऐसा करना खुद के साथ साथ शहर की सुरक्षा से समझौता करने जैसा है। ब्लैक आउट के दौरान रोशनी बंद रखनी है, ताकि विरोधियों को उसका लाभ न उठा सके।
सीमा पार पाक की ओर से ड्रोन गिराए जाने की आंशका को देखते हुए जिले में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। रात साढ़े नौ बजे के दौरान हनुमानगढ़ रोड पर गांव सिहागावाली और लालगढ़ के बीच धमाकों की गूंज सुनाई दी तो लोग सहम गए। ये धमाके किस वजह से हुए? देर रात तक पुष्टि नहीं हो पाई। सदर सीआई सुभाषचन्द्र ने बताया कि धमाकों की गूंज दूर दूर सुनाई दी। जवाहरनगर सीआई देवेन्द्र सिंह ने भी स्वीकारा किया कि एकाएक धमाके की गूंज सुनाई दी। सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क किया है।
रात करीब नौ बजे सीमा पार मूवमेंट होने के संकेत मिले तो रेड जोन में शामिल होने से पूरे जिले में ब्लैक आउट कराया गया। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस ने रात सवा नौ बजे ब्लैक आउट कराया।
देर रात को सूरतगढ़ रोड पर होमलैंड सिटी और हनुमानगढ़ रोड पर रिद़िध सिद़िध एनक्लेव के पास किसी ड्रोन गिराए जाने की सूचना मिली। पत्रिका टीम जब पहुंची तो इन दोनों कॉलोनियों के आसपास ऐसी कोई मूवमेंट या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। दोनों जगह स्थिति सामान्य मिली।
शाम सात बजकर आठ मिनट का समय और गोलबाजार के आम्बेडकर चौक के आसपास दुकानों के आगे खड़े दुकानदार इस संशय में थे कि कोई आएगा और उसके आते ही दुकान बंद कर देंगे, लेकिन अगले दस मिनट में ऐसी स्पर्धा हुई कि दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर ताले लगाने लगे। अधिकांश दुकानदार तो पन्द्रह मिनट में सारा सामान समेट कर ताला लगाकर अपने घरों की ओर रवाना हो गए। इस एरिया के अलावा गुरु तेग बहादुर मार्ग, स्वामी दयानंद मार्ग, सदर बाजार, तहबाजार, जवाहर मार्केट, महावीर शॉपिंग सेंटर, प्रताप मार्केट, पटेल मार्केट और पुरानी धानमंडी एरिया शाम साढ़े सात बजे तक एकाएक सन्नाटे में पसर गया। युद्ध की परिस्थितियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन की ओर से बाजार बंद करने का आग्रह किया गया था, ऐसे में व्यापारियों और दुकानदारों ने स्वत: शाम सात बजे से दुकानें बंद करने शुरू की। पौने आठ बजे तक पूरा बाजार खाली हो चुका था। बीरबल चौक के पास सब्जी मंडी एरिया में सब्जी की खरीददारी करने के लिए खासा भीड़ हो गई। देखते-देखते रात आठ बजे बिजली बंद होते ही ब्लैक आऊट जैसा माहौल नजर आया।
कई दुकानदार एक दूसरे को भाईजी बोलकर बस यही सवाल कर रहे थे कि बाजार बंद करने का आदेश किसने जारी किया है। कोई एसपी का नाम बोल रहा था तो कई जिला कलक्टर का तो कई तो सीएम आदेश से बाजार बंद होने के बारे में बतियाते हुए दिखाई दिए। गांधी चौक पर पुस्तक विक्रेता सुरेन्द्र का कहना था कि शाम करीब पांच बजे जिला प्रशासन की बैठक के दौरान व्यापारियों ने स्वत: बंद करने का संकल्प लिया था। ऐसे में दो घंटे पहले दुकान बंद कर दी।
कई लोगों को बाजार आने पर बंद की जानकारी मिली तो वे मायूस होकर लौटे। अधिवक्ता नीरज गोयल अपने परिवार संग आया तो दुकानों के शटर बंद होते देख वापस घर लौट गए। जल्दी बाजार बंद होने से रवीन्द्र पथ, लक्कड़मंडी रोड, गौशाला मार्ग, रेलवे स्टेशन रोड, संतोषी माता मंदिर रोड, सुखाड़िया मार्ग आदि मुख्य मार्गो पर घर लौटने वाले व्यापारियों, सेल्समेन और ग्राहकों में होड़ सी मच गई। बीरबल चौक पर एक ही ट्रैफिक कार्मिक यातायात कंट्रोल करने का प्रयास कर रहा था।
बाजार से लेकर इंदिरा वाटिका के सामने रेहड़ी पर सामान बेचने वाले दुकानों ने अपनी पीड़ा बताई। इनका कहना था कि शाम सात बजे दुकानें बंद करने के लिए जिला प्रशासन और व्यापारी संगठन ने सुबह आठ बजे निर्णय लिया होता तो नुकसान झेलना नहीं पड़ता। शाम सात बजने से पहले ही बाजार बंद हो गए।
रवीन्द्र पथ और गौशाला मार्ग पर ऐसे भी दुकानदार दिखाई दिए जिन्होंने अपनी दुकान बंद नहीं की। लेकिन आसपास की अधिकांश दुकानें बंद होती देखी तो अपने परिचितों को मोबाइल फोन कर वास्तु स्थिति से बारे में पता कराया। ऐसे दुकानदारों ने जब बाजार से लगातार व्यापारियों और अन्य लोगों की घर लौटने की भीड़ देखी तो अपने प्रतिष्ठान बंद करना उचित समझा।
संयुक्त व्यापार मंडल के अध्यक्ष तरसेम गुप्ता ने बताया कि दुकानदारों ने छोटे से आग्रह पर स्वत: बंद कर भारतीय सेना का हौसला बढ़ाया है। गुप्ता ने बताया कि जब जब देश पर कोई संकट आया है तब तब व्यापारियों ने सहयोग किया है। शाम सात बजे के बाद दुकानदारों ने बाजार बंद कर एकता की मिसाल पेश की है।
Updated on:
9 May 2025, 8:46 AM IST
Published on:
9 May 2025, 8:42 AM IST
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