
गंगनहर में कालूवाला हैड के पास कचरे के साथ बहकर आया श्वान का शव।
राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर की लाखों की आबादी की प्यास बुझाने और खेतों को सरसब्ज करने वाली ऐतिहासिक गंगनहर में एक बार फिर पंजाब की तरफ से भारी मात्रा में कचरा और मरे हुए जानवरों के शव बहकर आने का गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय जल संसाधन विभाग द्वारा हर बार आधिकारिक रूप से कड़ा विरोध जताने के बावजूद पंजाब सिंचाई विभाग और वहां का स्थानीय प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। इस बार गंगनहर में भारी मात्रा में ऐसा कचरा आया है, जो किसी जगह पर सफाई के बाद जमा किए गए कचरे के ढेर जैसा लगता है। इसके साथ ही पानी के बहाव में आवारा कुत्तों (श्वानों) के कई शव भी तैरते हुए श्रीगंगानगर सीमा में प्रवेश कर गए हैं।
इस भयावह स्थिति को लेकर श्रीगंगानगर जिले के किसानों, आम नागरिकों और समाजसेवियों में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक दशक में यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कम से कम 3 बार गंगनहर में भारी संख्या में पोल्ट्री फार्म की मरी हुई मुर्गियों और मवेशियों के शव बहाए जा चुके हैं। पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में गंगनहर को खुले डस्टबिन की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पश्चिमी राजस्थान के इस पूरे बेल्ट में पीलिया, आंतों की गंभीर बीमारियां और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
गंगनहर में कचरा और मृत जानवरों के शव आने की जानकारी मिलने के बाद किसान संघर्ष समिति के वरिष्ठ नेता अमरसिंह बिश्नोई ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि नहर में बहकर आया कचरा साफ तौर पर दर्शाता है कि पंजाब क्षेत्र में नहर किनारे एकत्रित किए गए कचरे के बड़े ढेर को सीधे पानी में उड़ेल दिया गया है।
किसान नेता ने आरोप लगाया कि घटना की तुरंत सूचना जल संसाधन विभाग के स्थानीय अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन शुरुआती स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों ने इस विषय पर कोई तत्परता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि जब भी पंजाब में पोल्ट्री फार्मों के भीतर बीमारियों से मुर्गियों या अन्य जानवरों की मौत होती है, तो उन्हें जमीन में दफनाने या सही तरीके से निस्तारित करने के बजाय नहर में फेंक दिया जाता है। यह राजस्थान के लोगों के स्वास्थ्य के साथ सीधा-सीधा खिलवाड़ है।
श्रीगंगानगर और आसपास के इलाकों में गंगनहर केवल सिंचाई का माध्यम नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों के पीने के पानी का भी मुख्य स्रोत है। राजस्थान को यह पानी किसी खैरात में नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय जल समझौते के तहत मिलता है। इसके बावजूद पंजाब के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला जहरीला केमिकल, सीवरेज का दूषित पानी और अब यह ठोस कचरा सतलुज और गंगनहर के पानी को जहरीला बना रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय जल संरक्षकों का मानना है कि पानी में मौजूद भारी धातुएं और मरे हुए जानवरों के सड़ने से पैदा होने वाले बैक्टीरिया सीधे मानव शरीर में जाकर आंतों में घाव कर रहे हैं। यही घाव आगे चलकर कैंसर जैसी घातक बीमारी का रूप ले लेते हैं। क्षेत्र में पहले से ही दूषित पेयजल के कारण कैंसर मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है, ऐसे में नहर में सड़ते शवों का आना जनस्वास्थ्य के लिए बेहद भयानक स्थिति पैदा कर रहा है।
गंगनहर में पंजाब की तरफ से कचरा और मृत मवेशी फेंकने का यह सिलसिला नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर बार राजस्थान प्रशासन की ओर से पत्र लिखे जाते हैं, लेकिन कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं होती:
29 मई 2024 की घटना: गंगनहर में भारी मात्रा में मरी हुई मुर्गियों के शव बहकर आए थे। उस समय श्रीगंगानगर के तत्कालीन जिला कलेक्टर लोकबंधु ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब के फाजिल्का उपायुक्त (DC) को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि, पंजाब पुलिस दोषियों का पता तक नहीं लगा सकी।
20 मई 2026 की घटना: गंगनहर में दोबारा मुर्गियों के शव मिलने के बाद जल संसाधन विभाग श्रीगंगानगर के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता धीरज चावला ने पंजाब सिंचाई विभाग फिरोजपुर के अधीक्षण अभियंता को एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के लिए आधिकारिक पत्र भेजा था। इस मामले में भी आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
वर्तमान मामले की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग श्रीगंगानगर वृत्त के अधीक्षण अभियंता संजीव वर्मा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा अधिशासी अभियंता को तुरंत मौके पर भेजकर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है ताकि कचरे की प्रकृति और स्रोत का सही पता लगाया जा सके।
अधीक्षण अभियंता ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि कचरा और जानवरों के शव पंजाब सीमा से ही बहकर आए हैं, तो पंजाब सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों के सामने फिर से कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा और दोषी लोगों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी। बहरहाल, स्थानीय निवासियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस मामले को मुख्यमंत्री स्तर पर उठाकर पंजाब सरकार पर सख्त कार्रवाई के लिए दबाव बनाया जाए।
Updated on:
28 Oct 2026, 11:46 AM IST
Published on:
28 Oct 2026, 11:21 AM IST
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