
प्रतीकात्मक तस्वीर
श्रीगंगानगर। श्रीविजयनगर क्षेत्र के चक 40 जीबी निवासी 50 वर्षीय लखविंद्र सिंह पुत्र जंगीर सिंह की बुधवार को राजकीय जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने लखविंद्र के रेबीज जैसे लक्षण होने की आशंका जताई है, जिससे अस्पताल में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार लखविंद्र के पालतू कुत्ते की करीब 10 दिन पहले मौत हो गई थी, जिसके बाद उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। बुधवार को गंभीर हालत में अस्पताल लाने पर इमरजेंसी कक्ष में उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों के अनुसार लखविंद्र का व्यवहार असामान्य था। मामले की सूचना पर पीएमओ डॉ. सुखपाल सिंह बराड़ सहित चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची। एहतियातन इमरजेंसी कक्ष की हाइपो से सफाई करवाई गई तथा मरीज के संपर्क में आए बेड व स्ट्रेचर हटाए गए। मरीज के संपर्क में आए करीब आधा दर्जन लोगों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए।
पीएमओ ने बताया कि मुंह में झाग जैसे लक्षण दिखे थे, जो रैबीज से जुड़े हो सकते हैं। शव को मोर्चरी में रखवाया गया है और गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
जब किसी को रेबीज हो जाता है उसमें बुखार, सिरदर्द, जी मिचलाना, उल्टी करना, घबराहट, चिंता, भ्रम, निगलने में कठिनाई, अत्यधिक लार आना, बुरे और डरावने सपने, नींद की कमी जैसे आदि लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
पालतू जानवरों का टीकाकरण करवाना: अपने पालतू जानवरों का टीकाकरण करवाना न भूलें। बिल्लियों, कुत्तों और फेरेट्स को एंटी रेबीज वैक्सीन दी जा सकती है। अपने पशु चिकित्सक से सलाह लें कि आपके पालतू जानवरों को कितनी बार टीका लगवाना आवश्यक है।
जानवरों के निकट: जंगली जानवरों के निकट न जाएं। रेबीज से प्रभावित जंगली जानवरों में मानवों का भय नहीं होता। किसी जंगली जानवर का मानवों के प्रति मित्रवत व्यवहार सामान्य नहीं है। इसलिए, ऐसे जानवरों से दूर रहना बेहतर है जो बेखौफ नजर आते हैं।
रेबीज का प्रकोप: यदि आप ऐसे देश की यात्रा कर रहे हैं जहां रेबीज का प्रकोप है और आप वहां लंबे समय तक रहने की योजना बना रहे हैं, तो अपने चिकित्सक से सलाह लें।
Published on:
25 Mar 2026 07:53 pm
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