
Action on illegal sand mines, (Photo- Patrika)
विश्रामपुर। एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद जिले में बेखौफ रेत उत्खनन और परिवहन (Illegal sand mining in Bishrampur) जारी है, इस बात का खुलासा संयुक्त टीम की औचक छापेमारी के दौरान हुआ। टीम ने रेत लोड 14 मिनी ट्रक जब्त किए हैं। इनमें नंबर प्लेट तक नहीं लगे थे। बताया जा रहा है कि जिले सहित सरगुजा संभाग में रोजाना बड़े पैमाने पर हो रहे रेत खनन और परिवहन का मामला शासन स्तर पर पहुंचा और इसके बाद सरगुजा संभाग में इन दिनों खनिज माफियाओं पर ताबड़तोड़ कार्रवाई हो रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के प्रतिबंध के बाजूद रेत का बेखौफ खनन इस अवैध कारोबार के गहरे जड़ों का खुलासा करने पर्याप्त है। वहीं कोरिया जिले के नौगई में रेत के कारोबार को लेकर ही भाजपा नेता समेत 3 लोगों को कार में जिंदा जला (Triple murder case) देने और फिर अंबिकापुर में नगर सैनिक पर रेत माफियाओं के हमले के बाद प्रशासन और भी सख्त हो गया है।
सूरजपुर जिला खनिज अधिकारी भूषण पटेल ने बताया कि प्रशासन को जानकारी मिली कि कांसापारा नदी घाट से रोजाना बड़े पैमाने पर रेत खनन और परिवहन (Illegal sand transporting) हो रहा है। इसके बाद कलेक्टर रेना जमील के निर्देश पर संयुक्त टीम गठित कर पुलिस बल के साथ सुबह 11 बजे कांसापारा नदी घाट में दबिश दी गई।
इस दौरान मौके का नजारा देख टीम के अधिकारी हैरान रह गए। टीम में शामिल सूरजपुर तहसीलदार सूर्यकांत साय, जिला खनिज अधिकारी भूषण पटेल व आरटीओ उडऩदस्ता अंबिकापुर की टीम ने पाया कि 14 मिनी ट्रक नदी के भीतर जहां तहां खड़े हैं। सभी वाहन रेत लोड हालत में थे और एक एक कर बाहर निकल रहे थे। इस दौरान टीम ने मार्ग को जाम कर दिया।
टीम के औचक छापे (Administration raid in Sand mines) की जानकारी और वाहनों के काफिले और हथियार बंद जवानों को देख संबंधित वाहनों के चालक परिचालक एवं मजदूर सब इधर-उधर भागने लगे। कुछ वाहनों के चालक ने अधिकारियों के सामने ही रेत को नदी में खाली कर दिया।
इस दौरान टीम ने मौके की वीडियोग्राफी कराते हुए नदी में मौजूद सभी वाहनों के नम्बर, चेचिस नंबर नोट कर एक-एक कर वाहनों को मौके से जयनगर थाना भेजने की कार्यवाही कराई। शाम तक अमला मौके पर डटा हुआ था।
पकड़े गई वाहनों में कुछ कोरिया जिले और कुछ अंबिकापुर, सिलफिली सहित स्थानीय रेत तस्करों के हैं। जिला खनिज अधिकारी भूषण पटेल ने शुक्रवार की कार्रवाई के संबंध में बताया कि वर्तमान में अवैध खनिज परिवहन में अर्थदंड की राशि 15 हजार से बढ़ाकर शासन ने 25 हजार एवं खनिज की मात्रा के हिसाब राशि वसूली के आदेश जारी किए हैं।
शुक्रवार को वाहन क्रमांक सीजी 15 ईजी 6335, सीजी 15 ईएफ 4329, सीजी 15 ईजे 7521, सीजी 15 ईजे 8878, सीजी 15 ईएच 1768, सीजी 15 ईएफ 9940, सीजी 15 ईएफ 6936, सीजी 15 ईएफ 6211, सीजी 15 ईएफ 1889, सीजी 15 ईएफ 7847, सीजी 29 एसी 7669, सीजी 15 ईसी 5589, सीजी 15 ईडी 7608 व सीजी 15 ईएफ 7638 पर कार्रवाई की गई है।
संयुक्त टीम की कार्यवाही के दौरान रेत लोड सभी गाडिय़ों में आगे पीछे नंबर प्लेट नहीं लगे थे। इसके पीछे के कहानी की भी पुलिस व आरटीओ अमला जांच कर रहा है। बताया जा रहा है कि रेत तस्कर (Sand smugglers) जान-बूझकर रेत परिवहन में लगे वाहनों में नंबर अंकित नहीं होने देते हैं, जिससे वाहनों की पहचान छिपी रहे। ऐसे में वे दिनभर उक्त वाहनों से रेत ढोने का कारोबार बेख़ौफ करते हैं। इसका लाभ रेत तस्करों को इस तरह होता है कि उनकी पहचान छिपी होती है और वे नजर में नहीं आते हैं।
रेत के अवैध कारोबार (Illegal sand business) के पीछे सबसे बड़ा पहलू यह है कि मुफ्त में नदी से रेत निकालने का खर्च एक ट्रिप का डेढ़ हजार होता है। यही रेत संभाग मुख्यालय अंबिकापुर पहुंचते ही 5-6 हजार या उससे अधिक हो जाता है। छापेमारी के दौरान पूछताछ में वाहन के चालकों ने बताया कि एक वाहन अधिकतम पांच से 6 ट्रिप रोज लगा लेता है।
इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि यह कारोबार दिन दूना-रात चौगुना मुनाफा वाला कारोबार साबित हो रहा है। बताया जा है कि इस अवैध कारोबार में जिले में सैकड़ों वाहन लगे हैं, जो शासन को बिना एक रुपए रॉयल्टी दिए धड़ल्ले से रेत का कारोबार कर रहे हैं, जिन्हें सफेदपोशों का संरक्षण प्राप्त है।
Published on:
26 Jun 2026 07:49 pm
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