
सूरत.
केन्द्र सरकार की ओर से देशभर में ज्वैलर्स के लिए ज्वैलरी बेचने के लिए होलमार्क अनिवार्य करने की दिशा में कवायद की जा रही है। इसके लिए ज्वैलर्स को ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड से सर्टिफिकेट लेना होगा। जैम्स एंड ज्वैलरी फैडरेशन ने इसका विरोध किया है।
आगामी दिनों में ज्वैलरी को यूनिक आईडी नंबर और होलमार्क का निशान लगाकर ही बेचा जा सकेगा। जैम्स एंड ज्वैलरी फैडरेशन ने इस बारे में कुछ विचार करने की मांग की है। फैडरेशन के सदस्य नैनेश पच्चीगर ने बताया कि भारत में अभी तक सिर्फ 500 होलमार्किंग सेंटर हैं। होलमार्क अनिवार्य करने पर ज्वैलर्स के लिए परेशानी होगी। दक्षिण गुजरात में लगभग 3500 ज्वैलर हैं, जिनमें 80 प्रतिशत छोटे हैं। इन ज्वैलर के पास स्टाफ और कम्प्यूटर नहीं हैं। वह यूआईडी नंबर जनरेट करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा होलमार्क के लिए सभी ज्वैलर्स को ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड से तीन साल का सर्टिफिकेट लेना होगा। इसके लिए लगभग 32,000 रुपए फीस देनी होगी। पच्चीगर ने कहा कि यह रकम छोटे ज्वैलर्स के लिए बड़ी है। इसे कम करना चाहिए।
कस्टम ड्यूटी और जीएसटी ने बढ़ाई मुसीबत
गोल्ड पर दस प्रतिशत और ज्वैलरी पर तीन प्रतिशत जीएसटी होने के कारण स्थानीय ज्वैलरी विदेश में महंगी पड़ रही है। इसका सीधा नुकसान ज्वैलर्स को हो रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में गोल्ड ज्वैलरी का निर्यात भी घटा है। जैम्स एंड ज्वैलरी फैडरेशन ने केन्द्र सरकार से गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी घटाने की मांग की है। मार्च में गोल्ड ज्वैलरी का निर्यात पिछले साल की अपेक्षा सात प्रतिशत घटा है। उद्यमियों का कहना है कि केन्द्र सरकार की ओर से गोल्ड पर 10 प्रतिशत ड्यूटी लगाई गई है। इससे विदेश से आयातित गोल्ड की कीमत पहले ही बढ़ जाती है। इसके बाद यहां तीन प्रतिशत जीएसटी लगाने के कारण स्थानीय उद्यमियों की ज्वैलरी महंगी पड़ रही है। भारत में बनने वाली ज्वैलरी अमरीका, यूरोप, हांगकांग, रूस सहित कई देशों में निर्यात होती है, लेकिन गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी लागू होने के बाद उद्यमियों को दिक्कत आ रही है। तीन प्रतिशत जीएसटी लगने से दिक्कत और बढ़ गई है।
Published on:
10 May 2018 08:26 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
