भारतीय गौ रक्षा मंच के अध्यक्ष धर्मेश गामी ने बताया कि मकर संक्रांति के बाद भी शहर भर में बिजली के तारों और खंभों पर मांझा अटका हुआ था, जिससे पक्षियों के घायल होने की आशंका बनी हुई थी। वाहन चालकों को भी इससे खतरा था, जिसे देखते हुए उन्होंने जिनाज्ञा सेवा ट्रस्ट के प्रमुख पीयूष शाह के साथ मिलकर मांझा इकठ्ठा करने का अभियान शुरू किया था। साथ ही एक किलो मांझा इकठ्ठा करके लाने वाले व्यक्ति को पुरस्कार देने की भी घोषणा की गई थी। 15 जनवरी से 19 जनवरी तक चार दिनों में उन्होंने खुद कई जगह लटके मांझे को एकत्र किया तो लोगों की ओर से भी मांझा इकठ्ठा कर उन तक पहुंचाया गया। इस तरह 35 किलो से अधिक मांझा एकत्र हुआ, जिसे शनिवार शाम तापी नदी के तट पर जला दिया गया।