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VNSGU : सिंडीकेट बुलाने की मांग

कुलपति को ज्ञापन सौंप कर तत्काल सिंडीकेट की बैठक बुलाने की मांग
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सूरत

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Divyesh Kumar Sondarva

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Updated: 30 Aug 2018, 7:56 PM IST

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VNSGU : सिंडीकेट बुलाने की मांग

सूरत.

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के सिंडीकेट सदस्य भावेश रबारी ने बुधवार को कुलपति को ज्ञापन सौंप कर तत्काल सिंडीकेट की बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि फेक्ट कमेटी के समक्ष नकल के कई आरोपी विद्यार्थियों के मामले की जांच हुई है। सिंडीकेट में फेक्ट कमेटी की रिपोर्ट आने पर इन विद्यार्थियों के बारे में फैसला किया जाएगा। सिंडीकेट देर से हुई तो ऐसे विद्यार्थियों का भविष्य खराब हो सकता है। इसके अलावा मेथेमेटिक्स विभाग के एचओडी की नियुक्ति, लॉ की छात्रा की आत्महत्या की रिपोर्ट, कुलपति की योग्यता पर जांच प्रस्ताव जैसे कई मामले अटके हुए हैं।

कुलपति कार्यालय का घेराव

एनएसयूआइ ने शुक्रवार को वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय का घेराव किया। संगठन ने नई प्रवेश प्रणाली पर विरोध जताया और रामधुन गाकर प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों की परेशानी दूर करने की मांग की। कुलपति डॉ.शिवेन्द्र गुप्ता ने पदभार संभालते ही 20 साल पुरानी केंद्रीय प्रवेश प्रणाली बंद कर विकेंद्रित प्रवेश प्रणाली लागू की थी। यह प्रणाली विद्यार्थियों को सुविधा के बजाय दुविधा दे रही है। इसके खिलाफ सिंडीकेट सदस्य भावेश रबारी की अगुवाई में एनएसयूआइ के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को कुलपति कार्यालय का घेराव किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने कुलपति कार्यालय के पास धरना भी दिया। संगठन ने मांग की कि नई प्रवेश प्रणाली में सुधार किया जाए। यूजी, पीजी और लॉ में प्रवेश को लेकर विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं। हेल्प सेंटर और हेल्पलाइन नहीं है।

नई प्रवेश प्रणाली ने विद्यार्थियों को खासा परेशान किया

विश्वविद्यालय के नए प्रशासन ने नई प्रवेश प्रक्रिया लागू कर कॉमर्स और साइंस के यूजी तथा पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश देना शुरू किया। नई प्रवेश प्रक्रिया से प्रवेश जल्द पूरे कर लेने का दावा किया गया था। सरलता से प्रवेश का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन विश्वविद्यालय के दावे खोखले साबित हुए। नई प्रवेश प्रणाली ने विद्यार्थियों को खासा परेशान किया। कॉलेज प्रशासन भी नई प्रवेश प्रणाली से परेशान हैं। साइंस में विषय वार मेरिट तैयार नहीं की गई, जिससे परेशानी और बढ़ गई। विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज धक्के खाने पड़ रहे हैं। वहां उचित जवाब नहीं मिलने पर विश्वविद्यालय आना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी विद्यार्थियों को सही जवाब नहीं मिल रहा है। इसलिए कई विद्यार्थी अब अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने लगे हैं। विद्यार्थियों की परेशानी का जवाब देने के लिए कोई हेल्प सेंटर या हेल्पलाइन नहीं है। साइंस की तरह कॉमर्स का भी यही हाल है। विद्यार्थियों को मनपसंद महाविद्यालयों की ओर से मैसेज नहीं आ रहे है। दक्षिण गुजरात के दूर-दराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बारिश और अन्य कारणों से महाविद्यालय पहुंचने में जरा-सी देर होने पर उन्हें प्रवेश प्रक्रिया से बाहर कर देने के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे विद्यार्थी विश्वविद्यालय के बड़े अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन किसी तरह के कदम नहीं उठाए गए। अब तक प्रथम परीक्षा का आधा पाठ्यक्रम हो जाना चाहिए था, लेकिन विद्यार्थी प्रवेश के लिए धक्के खा रहे हैं। विश्वविद्यालय की लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को ही भुगतना पड़ रहा है।

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