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काॅलेज शिक्षकों के प्रमोशन में खत्म होगी एपीआई!

एचआरडी की हाईलेवल कमेटी ने की संस्तुति, शिक्षक संगठनों ने एपीआई का विरोध किया था
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Ashish Kumar Shukla

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Jan 25, 2016

गोरखपुर.
उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के प्रमोशन के लिए बनाई गई एपीआई को
जल्द ही खत्म किया जा सकता है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा
गठित हाईलेवल कमेटी ने इसके लिए संस्तुति कर दी है। जल्द ही इस संबंध में
शासनादेश जारी किया जा सकता है। इसके अलावा 2002 से 2003 तक पीएचडी की
डिग्री हासिल करने वाले या रजिस्ट्रेशन कराने वालों को शिक्षक भर्ती में
नेट या स्लेट से छूट की भी संभावना है।

बीते काफी दिनों से उत्तर
प्रदेश विवि संबद्ध शिक्षक संघ, आल इंडिया विवि संबद्ध शिक्षक संघ आदि ने
यूजीसी द्वारा बनाई गई शिक्षक पदोन्नति व्यवस्था का विरोध किया था। शिक्षक
संगठनों का तर्क यह था कि 30 जून 2010 को लागू की गई एपीआई व्यवस्था ने
शिक्षकों को काॅरपोरेट कर्मचारी बना दिया है। एपीआई के लिए अंक जुटाने में
शिक्षकों को कुलपति और प्राचार्य की चापलूसी करनी पड़ती थी।

शिक्षक संघ
के विरोध को देखते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक हाईलेवल
कमेटी का गठन किया था। सूत्रों के अनुसार कमेटी ने सकारात्मक रिपोर्ट
प्रेषित की है। कमेटी की रिपोर्ट में एपीआई को अव्यवहारिक बताया गया है।
कहा गया है कि इससे अध्यापक अध्यापन छोड़कर प्वाइंट के लिए अन्य कामों पर
ध्यान देंगे। शोध पर भी प्वाइंट है जबकि काॅलेजों में यह सुविधा नहीं होने
से इसका लाभ भी वहां के शिक्षकों को नहीं मिलेगा। कमेटी ने शिक्षक भर्ती
में 2002 से 2009 में पीएचडी करने या पंजीकरण कराने वालों को नेट या स्लेट
की अनिवार्यता से मुक्त रखने की संस्तुति की है। अब मंत्रालय की संस्तुति
के बाद यूजीसी भी इस पर अपनी मुहर लगाएगी।

कमेटी की रिपोर्ट शिक्षकों के पक्ष में होगीः गुआक्टा

गुआक्टा
के अध्यक्ष डाॅ. राजेश चंद्र मिश्र बताते हैं कि काॅलेजों में शोध
व्यवस्था है ही नहीं। विवि तक ही शोध कार्य सीमित है। ऐसे में काॅलेज
शिक्षक को अंक जुटाने में परेशानी होती है। श्री मिश्र कहते हैं कि
पदोन्नति के लालच में शिक्षक शिक्षण कार्य छोड़कर प्वाइंट जुटाने के लिए
सारी एनर्जी खर्च करेगा। वह पढ़ाने की बजाय एनएसएस, परीक्षा, प्रवेश जैसे
कार्याें में अपना सारा ध्यान केंद्रित करेगा। गुआक्टा के मंत्री डाॅ. एसएन
शर्मा बताते हैं कि अगर प्राचार्य खुश है तो शिक्षक को कमेटी में शामिल
करेगा और नहीं किया तो प्वाइंट कम हो जाएगा। इससे गुटबाजी बढ़ेगी और
काॅलेजों में माहौल भी खराब होगा। इसलिए एपीआई किसी भी सूरत में शिक्षक हित
के लिए ठीक नहीं।