1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Jal Vihar Mahotsav : महादेव को कुंड में जल विहार कराने का आज अनोखा पर्व, जानें क्या है इस महोत्सव की खासियत

Jal Vihar Mahotsav : मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के धार्मिक स्थल कुंडेश्वर धाम में आज बरसात रुकने पर गंदे पानी को स्वच्छ करने जल विहार करेंगे महादेव।

2 min read
Google source verification
Jal Vihar Mahotsav

Jal Vihar Mahotsav :मध्यप्रदेश एक जनजातिय बहुल प्रदेश है जिसकी वजह यहां हर महीने हमे अलग जिलों और कस्बों के अलग महोत्सव देखने को मिलते है। ऐसा ही एक महोत्सव आज शाम टीकमगढ़ समेत बुंदेलखंड के धार्मिक स्थल कुंडेश्वर धाम में होने वाला है।

इस महोत्सव का नाम है जल विहार महोत्सव जो देवों के देव महादेव को समर्पित है। यह महोत्सव तिथि के अनुसार बरसात के मौसम की समाप्ति के दिन किया जाता है जिसमे महादेव को कुंड में उतारा जाता है। इसमें हर साल बुंदेलखंड और अन्य क्षेत्रों से लाखों श्रद्धालु यहाँ आते है।

यह भी पढ़े - दबंगों का आतंक : किसान का घर किया जमीदोज, भाजपा नेता पर लगा आरोप

किस समय शुरू होगा आयोजन

यह महोत्साव आज रविवार की शाम 6 बजे महादेव की शोभायात्रा से शुरू होगा। टीकमगढ़ के कुंडेश्वर धाम मंदिर से भगवान राम और जानकी के साथ महादेव शहर का भ्रमण करेंगे। इस जुलुस में बुंदेली भजनों की गूंज में भक्त नाचते हुए दिखेंगे। इस शोभायात्रा के बाद महादेव को उषा कुंड में ले जाकर जल विहार कराया जाएगा। इसके बाद रात्रि 8 बजे से भजन संध्या का कार्यक्रम होगा जिसमे भजन गायक देव सिंह चौहान, बुंदेली गायिका कविता शर्मा, गोरस चंद्रभान वासुदेव, और बुंदेली कॉमेडियन राजू शुक्ला भक्तों को अपनी मधुर आवाज़ से महादेव की भक्ति में लीन करेंगे। आपको बता दें कि, जैसे-जैसे महोत्सव आगे बढ़ता है वैसे वैसे एक मेले का रूप ले लेता है।

यह भी पढ़े - राजस्थान में एमपी के 6 श्रद्धालुओं की मौत 3 गंभीर, खाटूश्याम जा रही कार को ट्रक ने रौंदा

क्यों मनाया जाता है महोत्सव

स्थानीय लोग और कुंडेश्वर मंदिर के पुजारियों के अनुसार, महादेव को जल विहार कराने की परंपरा का वर्णन वैसे तो धार्मिक ग्रंथों में मिलता है लेकिन कुंडेश्वर में यह परंपरा 1972 में शुरू हुई थी। इस महोत्सव को मनाने का कारण यह बताया जाता है कि बरसात के थम जाने के बाद तालाब में जो जल होता है वह अशुद्ध हो जाता है। उसी जल को शुद्ध करने के लिए महादेव स्वयं कुंड में जल विहार लेते है। इस साल कुंडेश्वर निवासी यहां अपना 53वां जल विहार महोत्सव मनाने वाले है।