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हड़ताल से एम्बुलेंस वाहनों के थमे रहे पहिए, जीप से चला रहे काम

अस्पताल प्रशासन के पास एक एम्बुलेंस और है, लेकिन वह काफी समय से कण्डम होने से उपयोगहीन साबित हो रही है।  
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टोंक

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Pawan Kumar Sharma

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Updated: 22 Mar 2018, 8:59 AM IST

 एम्बुलेंसकर्मियों की हड़ताल

देवली. प्रदेश में एम्बुलेंसकर्मियों की हड़ताल का दूसरे दिन भी राजकीय अस्पताल देवली में खासा असर दिखाई दिया।

देवली. प्रदेश में एम्बुलेंसकर्मियों की हड़ताल का दूसरे दिन भी राजकीय अस्पताल देवली में खासा असर दिखाई दिया। घायलों को लाने व ले जाने के लिए निजी एम्बुलेंस की मदद लेनी पड़ी। वहीं रोगियों व घायलों के परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि कर्मचारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को सामूहिक हड़ताल पर जाने का निर्णय किया था।

इसके चलते कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार को दूसरे दिन भी रही। हड़ताल से एम्बुलेंस 104, 108 व बेस एम्बुलेंस वाहनों के पहिए थमे रहे। मजबूरन अस्पताल प्रशासन को उनकी एकमात्र जीप एम्बुलेंस से काम चलाना पड़ रहा है। इसी वाहन के जरिए घायलों व रोगियों को लाने व ले जाने का काम किया जा रहा है।

हालांकि अस्पताल प्रशासन के पास एक एम्बुलेंस और है, लेकिन वह काफी समय से कण्डम होने से उपयोगहीन साबित हो रही है। उधर, सीएमएचओ कार्यालय ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर अस्पताल के एम्बुलेंस वाहन में हर समय चालक व नर्सिंगकर्मी की व्यवस्था करने को कहा तथा उनकी जानकारी भी मांगी है।

साथ ही अस्पताल प्रशासन को पेट्रोल व कर्मचारियों के भुगतान में किसी भी प्रकार से परेशान न होने की बात कही। वहीं किसी भी प्रकार का भुगतान यथासंभव एमआरएस से करने को कहा।


तो होती मददगार
राजकीय चिकित्सालय देवली में वर्ष 2005-06 के दौरान ट्रोमा यूनिट स्थापना के साथ ही एक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग सहित क्षेत्रों में होने वाले सडक़ हादसों के घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाना था, लेकिन कुछ वर्ष सही चलने के बाद से उक्त एम्बुलेंस बेकार खड़ी है। लगातार खड़ी रहने से एम्बुलेंस में कई खराबियां और हो गई।

फिलहाल चार स्टे्रचर वाली एम्बुलेंस कबाड़ हालत में अस्पताल परिसर में खड़ी है। हालांकि इस सम्बन्ध में स्थानीय चिकित्सालय प्रशासन ने कई बार उच्चाधिकारियों को सूचना दी, लेकिन बजट नहीं होने से वाहन की मरम्मत नहीं हो सकी। यदि उक्त वाहन ठीक होता तो, हड़ताल के इस दौर में रोगियों को काफी मदद मिलती।