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नियमों को दरकिनार कर घरों के बाहर सडक़ पर कर रहे नो पार्किंग में पार्किंग

पार्किंग के अभाव में रात को वाहन घरों के बाहर सडक़ पर ही या पास के पार्कों में खड़े किए जा रहे हैं।
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टोंक

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Pawan Kumar Sharma

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Updated: 26 Nov 2017, 7:13 AM IST

घरों के बाहर खड़े वाहन।

टोंक स्थित एक कॉलोनी में घरों के बाहर खड़े वाहन।

टोंक. आबादी क्षेत्रों व पार्कों में नो पार्किंग के बावजूद लोग बेखौफ पार्किंग कर रहे हैं। इससे मास्टर प्लान की धज्जियां उड़ रही है। लगातार बढ़ते जा रहे शहर में नए कॉम्प्लेक्स, बहुमंजिला इमारतें व मकान तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन इनमें नियमों को दरकिनार किया जा रहा है।

पार्किंग के अभाव में रात को वाहन घरों के बाहर सडक़ पर ही या पास के पार्कों में खड़े किए जा रहे हैं। जबकि इन्हें खड़ा करने के लिए आसपास स्थान नहीं होने पर भूमिगत व्यवस्था करना आवश्यक है। इसके बावजूद नियमों को धता बताया जा रहा है।

बेतरतीब पार्किंग से लोगों की आवाजाही बाधित हो रही है। लोगों को आवास के साथ-साथ मूलभूत सुविधाएं मिले। इसी को ध्यान में रखते हुए टोंक जिले का मास्टर प्लान बनाया गया, लेकिन जिम्मेदार ही इसे भूल गए।

वर्ष 2011 में बनाए गए मास्टर प्लान के तहत लोगों से आपत्ति व सुझाव मांगकर इसे 2012 में लागू किया गया। वर्ष 2031 तक को ध्यान में रखते हुए बनाए गए प्लान को लेकर प्रशासन कतई गम्भीर नहीं है।

फिर चाहे कॉलोनाइजर हो या फिर अन्य सभी बिना गाइडलाइन के ही निर्माण में जुटे हैं। बिना तैयारी के शहरों समेत गांवों में कॉलोनियों की बाढ़ आई हुई है। इसमें न पार्क का पता है ओर ना घरों में पार्किंग व मापदण्ड अनुसार सडक़ों का। जबकि मास्टर प्लान के तहत 30 से 40 फीट चौड़ी सडक़ें रखने का प्रावधान है।


मास्टर प्लान की पालना को लेकर गत वर्षों में समीक्षा करना तो दूर चर्चा तक नहीं की गई। जबकि स्थानीय स्तर पर नगर परिषद को ही नियमों की पालना करनी होती है। ऐसे में सुनियोजित विकास दूर की कौड़ी साबित हो रहा है।

सडक़ पर भी
शहर के घनी आबादी क्षेत्र में बेरोकटोक बनने वाले मकानों व दुकानों के बाहर निर्धारित पार्किंग व्यवस्था नहीं है। जबकि नियमों के अनुसार वाहन खरीदने के साथ पार्किंग होने का शपथ-पत्र लगाना पड़ता है। विभाग के मुताबिक शहर में करीब चार सौ छोटे चारपहिया वाहन है।

इसके साथ ही कॉम्प्लेक्स समेत अन्य बहुमंजिला इमारतों का निर्माण करने से पहले भूमिगत पार्किंग का बनाया जाना जरूरी है। नजर डाली जाए तो शहर के 80 फीसदी मकानों में पार्किंग का अभाव है। नगरपरिषद की ओर से भी वर्ष 2031 को ध्यान में रखते हुए कोई प्लान तैयार नहीं किया जा रहा।

घरों में पार्किंग का अभाव होने से अधिकतर लोग घरों के बाहर चारपहिया वाहन खड़े कर रहे हैं। इससे आसपास के लोगों को आवाजाही में समस्या हो रही है। शहर के मुख्य डाकघर के सामने बनी कॉलोनियों, कम्पू, शास्त्रीनगर, जिंसी, पुरानी टोंक समेत कई तंग गलियों में घरों के बाहर कारें खड़ी दिखाई देती है।

बन गए कचरागाह

शहर में नई आबादी में पानी, बिजली, पार्क जैसी सभी सुविधाएं विकसित किए जाने के नियम है। जबकि धरातल पर ऐसा दिखाई नहीं दे रहा। शहर में आवासन मण्डल की ओर से तीन दशक पहले बसाई गई हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में भी असुविधाओं की भरमार है।

शिवराज चौधरी, रामराय आदि लोगों का कहना है कि 19 वर्षों से हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में रह रहे हैं, विकास शुल्क लिया गया है। इसके बावजूद सडक़ों व पार्कों का बुरा हाल है। पार्क कचरागाह समान दिखाई देते है।