
महाविद्यालय में लगी सौर उर्जा की प्लेटें
उनियारा. राजकीय महाविद्यालय में सौर उर्जा से बिजली उत्पन्न होने लगी है। इससे अब महाविद्यालय को बिजली का बिल जमा नहीं कराना पड़ रहा है।
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत महाविद्यालय में सौर उर्जा (रूसा) की ओर से महाविद्यालय को चुना गया। इसमें सौर उर्जा की संचालित प्लेटें लगाई गई।
सौर उर्जा की प्लेटें लगाने से महाविद्यालय को दो माह से बिजली का बिल औसतन 40 से 50 हजार तक जमा कराना नहीं पड़ रहा है, क्योंकि सौर संचालित प्लेटों से ही उसे बिजली पूूरी उपलब्ध हो रही है। साथ ही प्रतिदिन इन प्लेटों से जितनी बिजली उत्पन्न होती है। उसका जितना महाविद्यालय उपभोग कर सके, उतना करने के बाद शेष बिजली को वह विद्युत वितरण निगम को स्टोर के लिए भिजवा देता है।
इसको वह जब महाविद्यालय को इन प्लेटों से बिजली उपलब्ध नहीं होगी। तब वह ले सकता है। इसके लिए निगम ने एक सब मीटर लगवा दिया है। इसमें प्रतिदिन सौर उर्जा की प्लेटों से कितना विद्युत का उत्पादन हुआ और कितनी काम आई तथा निगम को कितनी मिली। इन सबका इन्द्राज किया जाता है।
आंख-मिचौली अब नहीं करती परेशान
जब से सौर उर्जा की प्लेटें महाविद्यालय में लगी है। तब से ही महाविद्यालय की विद्युत व्यवस्था पूरी संचालित हो रही है। जबकि पूर्व में कई बार बिजली नहीं होने के कारण कई जरूरी काम अटके पड़े रहते थे। वे अब प्रतिदिन हो रहे हैं। सौर उर्जा प्लेटों से लगभग 100 यूनिट के उत्पादन हो जाता है।
सौर ऊर्जा से मिल रही बिजली
महाविद्यालय में लगी प्लेटों से बिजली पूरी मिल रही है। अब बिजली की आंख-मिचौली महाविद्यालय के काम में बाधा नहीं डाल रही है।
डॉ. अलका अग्रवाल, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, उनियारा
टोंक. शहर में जलदाय विभाग की 47.20 करोड़ की योजना के तहत पाइप लाइन डालने का कार्य किया गया। ये कार्य शहर के मुख्य मार्गों में किया गया। खोदी गईसडक़ों के जख्म दो साल बाद भी नहीं भर पाए हैं। मोतीबाग मोड़ से एपीआरआई, बस स्टैण्ड तथा छावनी में सडक़ दो पाटों में बंट गई है। जबकि इस मार्गपर देश के कईशहरों की बसों का आवागमन रहता है। जयपुर बायपास से लेकर बस स्टैण्ड तक बसें हिचकोले खाती हुई चलती है।
Published on:
5 Feb 2018, 1:08 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.