
Patrika Impact : आखिर, दफन प्राकृृृृतिक नालों की सुध लेने पहुंचे अधिकारी, पत्रिका ने उठाया मुद्दाा
उमेश मेनारिया/ मेनार. गांव के दोनों जलाशयों में पानी की आवक के मुख्य नालों को पाटकर हो रहे सिक्स लाइन विस्तार कार्य को लेकर लापरवाही के मामले में सोमवार को टीम मौके पर पहुंची।राजस्थान पत्रिका में सोमवार को ‘सिक्स लेन की चपेट में प्राकृतिक नाले होंगे दफन’ शीर्षक से खबर प्रकाशन के बाद प्रशासन हरकत में आया। मुख्य वन संरक्षक राहुल भटनागर के निर्देश पर क्षेत्रीय वनाधिकारी गणेशलाल गोटवाल, पक्षीविद् विनय दवे मेनार पहुंचे। सरपंच गणपतलाल, उपसरपंच शंकरलाल मेनारिया, जगदीश एकलिंगदासोत भी पहुंचे।
टीम ने बरसाती पानी आवक के अवरुद्ध मार्ग देखे। इसके बाद वनाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा हुई। वनाधिकारी ने ग्राम पंचायत को दो दिन में नवानिया से मेनार तक विभिन्न जगहों पर अवरुद्ध हटाने को लेकर प्रस्ताव मांगा। जिसमें नवानिया पुलिया, आघरा मार्ग माल, पेट्रोल पंप के सामने, हाइवे से रुंडेड़ा कच्चा मार्ग के यहां निकासी करना सहित नवानिया से मेनार दोनों तरफ कच्चे नाले के निर्माण का प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए।
स्थानीय निवासी जीवन दावोत ने नेशनल हाइवे विस्तार के दौरान प्राकृतिक नालों को नष्ठ करने और पुलिया के यहां डाली गई मिट्टी को लेकर नेशनल हाइवे के अधिकारियों को ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत की। ये भी बताया कि ठेकेदार की ओर से सडक़ निर्माण के आसपास के क्षेत्रों में खोदी मिट्टी को नहीं हटाया गया, वहीं बायपास और अनेक मुख्य मार्गों पर दिशासूचक नहीं लगाए गए। ब्रिज निर्माण की जगहों पर दिए बाइपास का ढलान मापदण्ड के अनुसार नहीं दिया गया।
नहीं चेते तो होंगे प्रभावित
गौरतलब है कि मेनार स्थित सिक्स लाइन विस्तार के दौरान बारिश के पानी आवक के प्राकृतिक नाले सडक़ विस्तार में समा गए। वहीं किसी प्रकार की निकासी के लिए अन्य कोई नाला नेशनल हाइवे प्राधिकरण की ओर से नहीं बनाया गया। जिन जगहों पर पूर्व में पुलिया थी, वे भी विस्तार के दौरान उबड़-खाबड़ हो गई। पांच-सात पुलियाओं की जगह डाली गई मिट्टी को नहीं हटाया गया। नवनिर्मित होटल-पेट्रोल पंप के यहां पूर्व में रखी पाइपलाइन भी सिक्स लाइन विस्तार में टूट चुकी है। क्रॉसिंग वाले रास्तों पर बने कच्चे रास्तों के यहां ना तो पाइप रखे ना नाला बनाया। ऐसे ही मिट्टी डाल दी गई। करीब 5 किलोमीटर लंबे मार्ग के दोनों तरफ हजारों बीघा जमीन है, जहां बारिश के समय खेतों का पानी नालों में होकर मेनार के ब्रह्मसागर में आता है। इस वर्ष सडक़ विस्तार के समय नाले मिट चुके हैं, ऐसे में जलाशय भरेगा या नहीं संशय है। प्रवासी परिन्दे का आश्रय स्थल भी प्रभावित होगा।
Published on:
12 Jun 2018, 6:10 PM IST
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