
मो. इलियास/ उदयपुर . फर्जी बीमा क्लेम मामले में गैंग के सदस्यों ने गंभीर बीमारियों से पीडि़त आदिवासियों को बीमा कागजों में स्वस्थ्य दिखाने के लिए जयपुर से मेडिकल के जांच कागज व फिटनेस सर्टिफिकेट बनाए। इन पर सीएल पवार हॉस्पिटल के पैथोलोजिस्ट डॉ.नीरस अग्रवाल की सील लगी मिली। प्रारंभिक जांच में यह सील फर्जी सामने आ रही है, लेकिन पुलिस अधिकृत रूप से जांच के लिए वहां जाकर रिकॉर्ड लेगी। पुलिस का मानना है गांव छोडकऱ ये लोग शहर में इलाज करवाने नहीं आए तो वे जयपुर कैसे पहुंचे? यह अभी जांच का विषय है।
बीमा क्लेम के फर्जीवाड़े की जांच में जुटी टीम ने बताया कि जितने बीमित परिवार के मृतक थे उनकी अब तब मौतों के कारणों को लेकर संदेह है। कागजों में अधिकांश मौतों में पेड़ से गिरना, सर्पदंश व बैल के सिंग मारने से चोट के कारण बताए गए है। मौत से पहले इन मृतकों के अलग-अलग कंपनियों में बीमे हुए। बीमित व्यक्ति अधिकतम 2 साल या न्यूनतम एक माह तक जीवित रहा है। प्रारंभिक जांच में मौत के इन कारणों से स्पष्ट है कि बीमे के बाद इतनी कम अवधि में मौत से बीमित व्यक्ति कहीं न कहीं गंभीर बीमारी से ग्रसित था। परिजनों ने बयानों में पुष्टि की थी।
टीम ने बीमे के संबंधित कुछ रिकॉर्ड निकलवाए तो बीमित व्यक्तियों के स्वस्थ्य होने संबंधी कई मेडिकल के जांच के कागज व फिटनेस सर्टिफिकेट मिले, सभी कागजों पर सी41 रूप विहार कॉलेनी, न्यू सांगानेर रोड सोडाला जयपुर-19 स्थित सीपी पवार हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉ. नीरस अग्रवाल की सील लगी मिली। पुलिस ने बताया कि मामले में तथाकथित डॉक्टर मेल नर्स डालसिंह, दलाल रमेश चौधरी, बीमा एजेन्ट दिलीप मेघवाल व पूर्व उपसरपंच शंकरलाल की गिरफ्तारी के बाद ही पूरा खुलासा हो पाएगा। अभी सभी आरोपित फरार है। राजस्थान पत्रिका ने गत 30 मार्च के अंक में ‘जिनके खाने के लाले उनके नाम पर उठा लाखों का बीमा क्लेम’ शीर्षक से खबर प्रकाशन के बाद नित्य नए खुलासे किए थे। पुलिस ने जांच के बाद आरोपितों के विरुद्ध चोकडिय़ा (नाई) निवासी पुष्पा पत्नी रामा गमेती की रिपोर्ट पर मामला दर्ज किया। मामले की जांच में अब तक कई परतें खुलती ही जा रही है।
डेथ सर्टिफिकेट में बंद हुए हॉस्पिटल का नाम
बीमा कागजों में लक्ष्मण गमेती के नाम का एक मृत्यु प्रमाण पत्र मिला है। इस प्रमाण पत्र पर भूपालपुरा स्थित बालाजी हॉस्पिटल में मौत होना बताया गया। यह अस्पताल अब बंद हो चुका है। पुलिस ने जब लक्ष्मण के परिजनों से पड़ताल की तो पता चला कि लक्ष्मण बीमार था और गांव में ही स्कूल के निर्माण कार्य के दौरान चक्कर आने से गिरने पर उसकी मौत हुई थी। परिजनों ने किसी तरह की पुलिस कार्रवाई नहीं की और न ही उदयपुर में बालाजी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। इस मौत के पड़ताल के बाद पुलिस ने मृतक के पिता के बयान लिए। उसके बाद गैंग के सदस्य उसके पास कुछ पैसों को चेक लेकर भी पहुंचे लेकिन उन्होंने लेने से इनकार कर दिया।
Published on:
19 Apr 2018 01:31 pm
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