50-60 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जो 60 या इससे भी कम सेचुरेशन लेवल पर हॉस्पिटल आ रहे हैं। वे जांच में देरी कर रहे हैं तो उपचार भी समय पर नहीं ले रहे, ऐसे में बेहद गंभीर होने पर वे यहां पहुंचते है, तब तक काफी देर हो जाती है, इससे कई मरीजों को बमुश्किल बचाया जाता है। सभी को लक्षण होते ही तत्काल हॉस्पिटल पहुंचना है।