उदयपुर। गोवर्धन पूजा पर 35 से अधिक तरह की मौसमी सब्जियों को मिलाकर बनने वाला पारंपरिक 'अन्नकूट' सदियों से धरती की जैव-विविधता और फसल की भरपूरता के प्रति आभार का प्रतीक रहा है। लेकिन, आधुनिक खेती की होड़ में थाली का यह अन्नकूट अब खेतों से लगभग गायब हो चुका है। मक्का, गेहूं और सोयाबीन जैसी दो-तीन नकदी फसलों तक सिमटी मोनो क्रॉपिंग (एकल खेती) ने न केवल मिट्टी का दम घोंटा है, बल्कि अनियमित मानसून के दौर में किसानों को आर्थिक जोखिम में भी धकेल दिया है।