
जर्जर जनाना भवन
उदयपुर. जिले के सबसे बड़े जनाना चिकित्सालय के नए भवन का निर्माण लंबे समय से अटका हुआ है। करीब साढ़े सात साल से बंद पड़े पुराने भवन को गिराकर आठ मंजिला नया अस्पताल बनाया जाना है, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हो पाया। पहले भवन में तकनीकी खामी सामने आने के बाद जांच चली, फिर बजट की प्रक्रिया में मामला अटका और अब फर्म के साथ समझौते व जरूरी स्वीकृतियों की फाइल सरकार स्तर पर लंबित है। न पुराने भवन को गिराने का काम शुरू हुआ और न नए भवन के निर्माण की तारीख तय हो पाई है।
नए भवन के अभाव में अस्पताल को उपलब्ध जगह और संसाधनों के सहारे व्यवस्थाएं चलानी पड़ रही हैं। प्रसूताओं को एक वार्ड से दूसरे भवन में शिफ्ट करना पड़ता है। स्ट्रेचर से मरीजों को ले जाने में परेशानी आ रही है, वहीं नवजात शिशुओं को नर्सरी में भर्ती कराने के लिए एम्बुलेंस से बाल चिकित्सालय ले जाना पड़ रहा है। अस्पताल में मरीजों की संख्या और उपचार की जरूरत को देखते हुए नए भवन का निर्माण जरूरी है, लेकिन लंबित प्रक्रिया के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
लापरवाही का ऐसा भवन जो ले रहा समयजनाना चिकित्सालय के पुराने भवन पर निर्माण और मरम्मत के नाम पर करीब 11 करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन इसे उपयोग के लायक नहीं बनाया जा सका। शुरुआती चरण में हेरिटेज कार्य करने वाली कंपनी ने करीब पांच करोड़ रुपए खर्च किए। दो मंजिल की छत डालने के बाद भवन में दरारें आने लगीं। इसके बाद मरम्मत के लिए करीब छह करोड़ रुपए और खर्च किए गए, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। आखिरकार भवन को असुरक्षित मानते हुए खाली करना पड़ा। भवन के अनुपयोगी होने के बाद इसे गिराकर नया अस्पताल बनाने की योजना तैयार की गई। इस तरह करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद पुराना भवन स्वास्थ्य सेवाओं के काम नहीं आ सका। अब नया भवन बनाने की प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण अस्पताल को जगह की कमी के बीच काम करना पड़ रहा है।
जांच और बजट के बाद अब सरकार स्तर पर लंबित फाइल
भवन में तकनीकी खामी सामने आने के बाद जांच की प्रक्रिया चली। इसके बाद सरकार ने पुराने भवन को गिराकर आठ मंजिला नया अस्पताल बनाने की अनुमति दी। बजट भी स्वीकृति हो गया लेकिन इसके बावजूद टेंडर प्रक्रिया के बाद फर्म के साथ समझौते और जरूरी स्वीकृतियों में समय लग गया। अब फाइल सरकार स्तर पर लंबित है। निर्माण शुरू करने से पहले की प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने से परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
सालाना 18 हजार से अधिक प्रसव, रोज 60 से ज्यादा मेजर ऑपरेशन
जनाना चिकित्सालय में हर साल 18 हजार से अधिक प्रसव होते हैं। यहां प्रतिदिन 60 से ज्यादा मेजर ऑपरेशन भी किए जाते हैं। इतने बड़े मरीज भार वाले अस्पताल में पर्याप्त जगह और व्यवस्थित वार्डों की जरूरत है, लेकिन नए भवन के अभाव में मौजूदा व्यवस्थाओं पर दबाव बना हुआ है। प्रसूताओं को एक भवन से दूसरे भवन में शिफ्ट करना पड़ता है। सड़क मार्ग से स्ट्रेचर ले जाने में दिक्कत आती है और मरीज को सुरक्षित पहुंचाने के लिए कई लोगों की मदद लेनी पड़ती है। नवजात शिशुओं को नर्सरी के लिए एम्बुलेंस से बाल चिकित्सालय ले जाना पड़ रहा है। इससे अस्पताल की व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
Updated on:
12 Oct 2026 06:29 pm
Published on:
12 Oct 2026 06:29 pm
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