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उदयपुर : झीलों की सफाई से नाइट बाजार तक… 5 साल में बदलेगी लेकसिटी की सूरत व सीरत

महापौर पारस सिंघवी ने शहर के विकास का विजन सामने रखा है। 100 दिन की प्राथमिकताओं में झील संरक्षण, सीवर समस्या का स्थायी समाधान, सड़कों का पेचवर्क-डामरीकरण, पार्किंग और सफाई व्यवस्था शामिल है। पांच साल में स्वच्छता रैंकिंग सुधारने, नाइट बाजार विकसित करने, कम दर पर मांगलिक आयोजनों के लिए शेड उपलब्ध कराने और पात्र लोगों को पट्टे दिलाने का लक्ष्य है। निगम की सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने पर भी जोर रहेगा।
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उदयपुर. नगर निगम में नए बोर्ड के गठन के साथ शहर को लेकर नई उम्मीदें भी जगी हैं। इस बार शहर के 80 वार्डों की जमीनी स्थिति से परिचित महापौर पारस सिंघवी के सामने विकास के साथ व्यवस्थाओं को सुधारने की भी बड़ी चुनौती है। महापौर ने 100 दिन की प्राथमिकताओं में झीलों के संरक्षण, सीवर की समस्या के स्थायी समाधान, सड़कों के पेचवर्क और डामरीकरण के साथ पार्किंग व सफाई व्यवस्था को शामिल किया है। वहीं पांच साल के कार्यकाल में स्वच्छता रैंकिंग सुधारने, नाइट बाजार विकसित करने, मांगलिक आयोजनों के लिए कम दर पर शेड उपलब्ध कराने और पात्र लोगों को पट्टे दिलाने की बात कही है। शहर के विकास को लेकर महापौर के विजन पर राजस्थान पत्रिका ने उनसे बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश...

सवाल : शहर के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता कौन सी है, जिसे आप 100 दिन में पूरा करना चाहते हैं?

जवाब : मेरी पहली प्राथमिकता झीलों को सुरक्षित और संरक्षित करने के साथ ही उन्हें साफ-सुथरा बनाना रहेगी। उनमें सीवर का पानी नहीं जाए, इसके स्थायी समाधान किए जाएंगे। साथ ही सड़कों का पेचवर्क और डामरीकरण करवाया जाएगा। गार्डन, डिवाइडर, महापुरुषों की प्रतिमा स्थलों आदि को व्यवस्थित करवाने के साथ ही इनकी नियमित सफाई करवाई जाएगी।

सवाल : पुराने शहर और पर्यटन स्थलों पर ट्रैफिक जाम और पार्किंग की बड़ी समस्या है। इस जाम से निजात के लिए निगम क्या करेगा?

जवाब : शहर की पार्किंग को व्यवस्थित किया जाएगा। इनके संचालन और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। चांदपोल पार्किंग की लिफ्ट बंद है, उसे पुन: शुरू करवाया जाएगा। साथ ही अन्य स्थानों का चयन कर पार्किंग के रूप में विकसित किया जाएगा।

सवाल : व्यापारिक क्षेत्रों में अतिक्रमण की समस्या है। आपका व्यापारिक पृष्ठभूमि से जुड़ाव रहा है, तो व्यापारियों और आम जनता के बीच संतुलन कैसे बनाएंगे?

जवाब : व्यापारियों के साथ बैठक कर समझाइश करके मार्ग निकाला जाएगा। किसी को परेशानी नहीं हो, ऐसी व्यवस्था की जाएगी। अस्थायी अतिक्रमण को व्यवस्थित किया जाएगा।

सवाल : निगम की आय बढ़ाने के क्या नए स्रोत विकसित किए जाएंगे?

जवाब : नगर निगम के पास राजस्व प्राप्त करने का सबसे बड़ा सोर्स यूडी टैक्स है। कई लोग इसे जमा नहीं करवा रहे। टैक्स अधिक से अधिक जमा हो, इसके लिए लोगों से समझाइश की जाएगी।

सवाल : नगर निगम में निर्माण स्वीकृति, ट्रेड लाइसेंस और यूडी टैक्स जैसे कार्यों में आम जनता को चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए आप क्या कदम उठाएंगे?

जवाब : अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक कर उन्हें काम को समय पर पूरा करने के लिए पाबंद किया जाएगा। प्रयास रहेगा कि निगम में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार नहीं हो और यहां आने वाले कार्यकर्ता और शहर की जनता को नामांतरण, जन्म प्रमाण पत्र, भवन अनुमति सहित किसी भी कार्य के लिए अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़े। साथ ही नए जुड़े वार्डों में पानी की समस्या है। पाइप लाइन से वंचित क्षेत्रों की डीपीआर तैयार करवाकर सरकार को भेजी जाएगी और इसके लिए राशि स्वीकृत करवाकर काम करवाए जाएंगे।

सवाल : बोर्ड में बहुमत भाजपा के पास है, लेकिन विपक्ष (कांग्रेस व अन्य पार्षदों) को साथ लेकर शहर के विकास एजेंडे पर एकराय कैसे बनाएंगे?

जवाब : इस मामले में मेरा स्पष्ट कहना है कि पूरे शहर में विकास के मामले में भेदभाव नहीं किया जाएगा। हां, अगर विपक्ष के पार्षद बिना बात के हंगामा करते हैं तो उनको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

सवाल : उदयपुर की जनता को आपके पांच साल के इस कार्यकाल से क्या उम्मीदें रखनी चाहिए?

जवाब : स्वच्छता में शहर की रैंकिंग में सुधार के पूरे प्रयास करूंगा। शहर के बीच में किसी स्थान पर नाइट बाजार बनवाने का पूरा प्रयास रहेगा। यह स्थान आसान पहुंच के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने में परेशानी नहीं हो, ऐसा होगा। पांच हजार स्क्वॉयर फीट का एक शेड तैयार करवाया जाएगा, जिसमें आम लोग कम दर पर अपने मांगलिक और अन्य आयोजन कर सकेंगे। कई जगहों पर लोगों को पट्टों की समस्या है। ऐसे में जो वास्तव में पट्टों के लिए हक रखते हैं, उन्हें नियमानुसार पट्टे दिलवाए जाएंगे। साथ ही निगम के कार्यों की प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू की जाएगी।