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उदयपुर : सीमाएं बदलीं, आरक्षण तय हुआ… अब गांवों की सरकार के लिए दावेदारों की तलाश

पंचायत चुनाव से पहले नया राजनीतिक समीकरण तैयार हो गया है। परिसीमन के बाद जिले में 20 पंचायत समितियां, 590 ग्राम पंचायतें, 318 पंचायत समिति वार्ड और 1593 सदस्य पद होंगे। जिला परिषद के 47 सदस्य क्षेत्रों का भी परिसीमन पूरा हो चुका है। आरक्षण तय होने के बाद राजनीतिक दल और स्थानीय नेता संभावित दावेदारों की तलाश में जुट गए हैं। गोगुंदा 39 ग्राम पंचायतों और 109 सदस्य पदों के साथ सबसे बड़ा क्षेत्र है, जबकि सुलाव में सबसे कम 44 सदस्य पद होंगे।
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उदयपुर. पंचायत चुनाव से पहले जिले के गांवों में राजनीतिक बिसात नए सिरे से बिछने लगी है। पंचायत समितियों का नया परिसीमन सामने आने के बाद आरक्षण भी तय हो चुका है और अब राजनीतिक दलों से लेकर स्थानीय नेताओं तक दावेदारों की तलाश शुरू हो गई है। नई सीमाओं में कई ग्राम पंचायतों का क्षेत्र बदला है, पंचायत समिति वार्ड नए बने हैं और जिला परिषद के सदस्य क्षेत्रों का समीकरण भी बदला है। ऐसे में पुराने दावेदार अपनी सीट का आरक्षण देखकर अगला कदम तय कर रहे हैं, वहीं आरक्षित सीटों पर नए चेहरों की तलाश की जा रही है।

जिले में अब 20 पंचायत समितियां होंगी, जिनके अंतर्गत 590 ग्राम पंचायतें और 318 पंचायत समिति वार्ड रहेंगे। इन वार्डों में 1593 पंचायत समिति सदस्य पद होंगे। जिला परिषद के 47 सदस्य क्षेत्रों का परिसीमन भी हो चुका है। यानी गांवों की सरकार का पूरा चुनावी ढांचा सामने है और अब इसी ढांचे पर राजनीतिक दल उम्मीदवारों का गणित बैठा रहे हैं।

गोगुंदा सबसे बड़ा, कल्याणपुर और नाई सबसे छोटे

नए परिसीमन में ग्राम पंचायतों की संख्या के लिहाज से गोगुंदा सबसे बड़ा पंचायत समिति क्षेत्र होगा। यहां 39 ग्राम पंचायतें रहेंगी। इसके बाद कोटड़ा और खैरवाड़ा में 36-36 तथा फलासिया और सायरा में 35-35 ग्राम पंचायतें होंगी। झाड़ोल में 34, भीण्डर में 32, नयागांव में 31 तथा बड़गांव और ऋषभदेव में 30-30 ग्राम पंचायतें रहेंगी। मावली और कुराबड़ में 29-29, वल्लभनगर में 28, गिर्वा में 27 तथा देवला और घासा में 26-26 ग्राम पंचायतें होंगी। सुलाव में 23 ग्राम पंचायतें रहेंगी। सबसे कम ग्राम पंचायतें कल्याणपुर और नाई में 20-20 होंगी।

आरक्षण ने बदला दावेदारों का गणित

परिसीमन के साथ अब आरक्षण की स्थिति भी तय हो गई है। ऐसे में राजनीतिक दल और संभावित प्रत्याशी यह देख रहे हैं कि उनके प्रभाव वाला वार्ड किस श्रेणी में आया है। सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी और महिला आरक्षण के हिसाब से दावेदारों की सूची तैयार की जा रही है। नई सीमाओं के कारण कुछ नेताओं का पुराना क्षेत्र दूसरे वार्ड में चला गया है तो कहीं नए गांव जुड़ने से दावेदारी का क्षेत्र बदल गया है। ऐसे में कई पुराने दावेदारों को आरक्षण के साथ-साथ नए परिसीमन का भी हिसाब लगाना पड़ रहा है। दूसरी ओर जिन वार्डों में आरक्षण के कारण नए वर्ग के लिए रास्ता खुला है, वहां नए चेहरे भी सक्रिय होने लगे हैं।

318 वार्डों में 1593 सदस्य पदों पर नजर

पंचायत समिति वार्डों के नए गणित के अनुसार गोगुंदा और भीण्डर में सबसे अधिक 19-19 वार्ड होंगे। घासा, मावली, वल्लभनगर और खैरवाड़ा में 17-17 वार्ड रहेंगे। बड़गांव, ओगणा, फलासिया, झाड़ोल, कल्याणपुर, ऋषभदेव, सायरा, देवला, सुलाव, नाई, कुराबड़, गिर्वा और नयागांव में 15-15 वार्ड होंगे। इस तरह जिले की 20 पंचायत समितियों में कुल 318 पंचायत समिति वार्ड बनेंगे। इन वार्डों में कुल 1593 पंचायत समिति सदस्य पद होंगे।

गोगुंदा में सबसे ज्यादा 109, सुलाव में 44 पद

सदस्य पदों की संख्या में भी पंचायत समितियों के बीच बड़ा अंतर है। गोगुंदा में 19 वार्डों के लिए सबसे अधिक 109 पंचायत समिति सदस्य पद होंगे। वल्लभनगर में 104 और खेरवाड़ा में 102 सदस्य पद रहेंगे। भींडर में 100, मावली में 95, सायरा और फलासिया में 94-94 तथा झाड़ोल में 91 सदस्य पद होंगे। घासा में 85, नयागांव में 84 और कोटड़ा में 82 सदस्य पद रहेंगे। बड़गांव और ऋषभदेव में 76-76, कुराबड़ में 77 तथा गिर्वा में 68 सदस्य पद होंगे। नाई में 55, देवला में 53, कल्याणपुर में 47 और सुलाव में सबसे कम 44 सदस्य पद होंगे। सभी पंचायत समितियों के सदस्य पदों का कुल योग 1593 है।

जिला परिषद के 47 क्षेत्रों में भी नया राजनीतिक भूगोल

पंचायत समिति के साथ जिला परिषद के 47 सदस्य क्षेत्रों का परिसीमन भी गांवों की राजनीति का समीकरण बदल रहा है। कई जिला परिषद क्षेत्रों में एक ही पंचायत समिति की ग्राम पंचायतें शामिल हैं, जबकि कई क्षेत्रों में दो या तीन पंचायत समितियों की ग्राम पंचायतों को जोड़कर नया क्षेत्र बनाया गया है। सायरा के अलग-अलग क्षेत्रों में 11 और 12 ग्राम पंचायतें हैं। सायरा-देवला क्षेत्र में 6 और 9 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। गोगुंदा के एक क्षेत्र में 17 ग्राम पंचायतें हैं, जबकि गोगुंदा-देवला क्षेत्र में 5 और 9 ग्राम पंचायतों को जोड़ा गया है। सुलाव के अलग-अलग क्षेत्रों में 4, 12 और 7 ग्राम पंचायतें हैं। सुलाव-कोटड़ा के एक क्षेत्र में 12 और 8 तथा दूसरे में 7 और 2 ग्राम पंचायतों का संयोजन है। ओगणा-झाड़ोल-फलासिया क्षेत्र में क्रमश: 18, 1 और 2 ग्राम पंचायतें शामिल की गई हैं।

ऐसे बनेगी गांव की सरकार

20 पंचायत समितियां,318 पंचायत समिति वार्ड, 1593 पंचायत समिति सदस्य पद है। इन पंचायत समितियों के साथ 590 ग्राम पंचायतों में पंच-सरपंच के चुनाव होंगे। वहीं 47 जिला परिषद सदस्य क्षेत्रों में जिला परिषद सदस्यों का चुनाव होगा। परिसीमन और आरक्षण दोनों की तस्वीर सामने आने के बाद अब राजनीतिक दलों के सामने अगला काम इन सीटों पर स्थानीय चेहरों का चयन करना है।

एक नजर में नया ग्रामीण चुनावी ढांचा

20 पंचायत समितियां

590 ग्राम पंचायतें

318 पंचायत समिति वार्ड

1593 पंचायत समिति सदस्य पद

47 जिला परिषद सदस्य क्षेत्र

39 सबसे अधिक ग्राम पंचायतें गोगुंदा में

20 सबसे कम कल्याणपुर और नाई में

19 सबसे अधिक पंचायत समिति वार्ड गोगुंदा व भींडर

109 सबसे अधिक सदस्य पद गोगुंदा में

44 सबसे कम सदस्य पद सुलाव में