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शिप्रा के पानी का किया दुरुपयोग, तो मिल सकती है सजा

सिंचाई में उपयोग नहीं हो सकेगा शिप्रा का पानी, पेयजल परिक्षण अधिनियम लागू, कलेक्टर ने लगाई रोक। दो वर्ष की सजा या दो हजार का जुर्माना अथवा दोनों भुगतना पड़ सकता है।
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Lalit Saxena

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Updated: 2 Jan 2017, 9:34 PM IST

if do shipra water misuse, then get punishment

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उज्जैन. शिप्रा का पानी पेजयल के अलावा अन्य कार्य जैसे उद्योग, सिंचाई आदि के लिए उपयोग नहीं किया जा सकेगा। कलेक्टर संकेत भोंडवे ने पेयजल परीक्षण अधिनियम के तहत शिप्रा नदी के पानी को संरक्षित घोषित कर दिया है। पेयजल या घरेलू उपयोग के अलावा अन्य उपयोग पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ दो वर्ष की सजा या दो हजार का जुर्माना अथवा दोनों भुगतना पड़ सकता है।

जल स्तर लगातार गिर रहा
मुख्य नगर पालिका अधिकारी महिदपुर ने बताया था कि नगरीय क्षेत्र महिदपुर की पेयजल व्यवस्था का मुख्य स्त्रोत शिप्रा नदी है, लेकिन सिंचाई के लिए किसानों द्वारा पानी लेने से इसका जल स्तर लगातार गिर रहा है। इस कारण आगामी महीनों में पानी की उपलब्धता गत वर्ष की तरह शून्य होने की स्थिति बनेगी। उन्होंने पेयजल संकट उत्पन्न होने की आशंका जताते हुए शिप्रा नदी के जल पर सिंचाई के लिए प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था।


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कलेक्टर ने दिए निर्देश
- महिदपुर एसडीएम व मुख्य नगर पालिका अधिकारी निर्धारित करेंगे कि पानी का उपयोग केवल घरेलू प्रयोजन के लिए हो।

- इस उद्देश्य से जल के उपयोग के विविध तरीकों पर सतत निगरानी रखेंगे।

- अन्य प्रयोजनों के लिए उनके अधिकार क्षेत्र में जल उपयोग करते हुए पाए जाने की स्थिति में वैधानिक कार्यवाही करें।

- नगर पालिका महिदपुर, राजस्व विभाग, विद्युत मण्डल के दल अवैध पम्पों को जब्त करेंगे।