हिन्दू सिंह गुर्जर ने ये भी बताया कि इसके बाद उन्होंने रामलला के पास रखे कलश से पानी पिया और यहीं से सीधे सभी कार सेवकों के साथ वो बाबरी मस्जिद के ढांचे पर चढ़े और उसे ढहाया। उन्होंने बताया कि उस दौरान उन्हें और उनके कुछ साथियों को चोटें भी आईं थीं, जिसके चलते उन्हें फैजाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से इलाज कराने के बाद एक बार फिर स्थानीय प्रशासन ने उन्हें फिर से बाबरी ढांचे के पास छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि रामलला का भव्य मंदिर अब बन गया है, जिसका उद्घाटन होने जा रहा है। ऐसे में तराना से हम सभी कार सेवक एक बार फिर रामलला के दर्शन के लिए अधिक से अधिक संख्या में वहां पहुंचेंगे।