
Bahubali Leader
वाराणसी. लोकसभा चुनाव से पहले बाहुबलियो ने राजनीतिक समीकरण साधने शुरू कर दिये हैं। कुछ बाहुबली सीधे किसी पार्टी में शामिल है तो कुछ को बड़े दल के सहारे की जरूरत है। इसी बीच हाईकोर्ट ने बाहुबली धनंजय सिंह को किस आधार पर वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली है इस पर रिपोर्ट मांगी है। इससे साफ हो जाता है कि हाईकोर्ट सख्त हुआ तो दिग्गजों की सुरक्षा में कटौती हो सकती है यदि ऐसा होता है तो एक बार फिर बाहुबली आमने-सामने आ सकते हैं।
यह भी पढ़े:-जानिए वह पांच कारण जो अखिलेश व मायावती के गठबंधन को दे रहे हैं ताकत, बीजेपी नहीं खोज पा रही काट
यूपी के दो बाहुबली मुख्तार अंसारी व बृजेश सिंह के बीच ही जरायम की दुनिया का समीकरण चलता था समय के साथ कई और बाहुबली आये और अपनी जरूरत के अनुसार किसी एक खेमे के साथ हो गये। गाजीपुर के ऊसरी चटी में मुख्तार अंसारी पर चली गोली चली थी उसके बाद कभी भी बृजेश व मुख्तार अंसारी आमने-सामने नहीं आये थे। पर्दे के पीछे से खेमे के लोग गैंगवार करते रहते थे। पिछले कुछ समय से दोनों ही खेमा शांत हो गये है लेकिन खेमे से जुड़े लोग अभी भी सजग रहते हैं। बाहुबली धनंजय सिंह को बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय का खास माना जाता था और जब मुख्तार अंसारी व कृष्णानंद राय के बीच गोलीबारी हुई थी उस समय कृष्णानंद राय की मदद के लिए सबसे पहले धनंजय सिंह ही पहुंचे थे उसी समय से माना जाता है कि धनंजय सिंह अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रुप से बृजेश खेमा से जुड़े हैं। जौनपुर के बाहुबली धनंजय सिंह व बाहुबली अभय सिंह के बीच अच्छी दोस्ती थी लेकिन समय के समय दोस्ती में कड़वाहट आयी और दोनों ही बाहुबली एक दूसरे के दुश्मन बन गये। बनारस में ही वर्षों पूर्व धनंजय सिंह व अभय सिंह का काफिला आमने-सामने आ गया था और दोनों बाहुबलियों के सहयोगियों ने एक-दूसरे पर फायरिंग कर दी थी। जिसमे कुछ लोग घायल हुए थे इसके बाद भी धनंजय सिंह व अभय सिंह की दुश्मनी बहुत बढ़ गयी थी। कहा जाता है कि अभय सिंह को बाहुबली मुख्तार अंसारी का साथ मिलता है इसलिए अभय सिंह की ताकत भी बढ़ती गयी है। अभय सिंह को अखिलेश यादव का खास माना जाता है जबकि धनंजय सिंह के पास अभी किसी भी बड़े दल का सहारा नहीं है ऐसे में हाईकोर्ट ने बाहुबली धनंजय सिंह की सुरक्षा को लेकर यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी है। धनंजय सिंह को वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली है इसको लेकर सरकार क्या रिपोर्ट देती है और हाईकोर्ट क्या निर्णय सुनाता है यह तो समय ही बतायेगा, लेकिन इतना तो साफ है कि लोकसभा चुनाव से पहले जरायम की दुनिया में भी नये समीकरण का जन्म होगा।
यह भी पढ़े:-सीएम योगी से करना चाहता था भ्रष्टाचार की शिकायत, छुट्टी लेकर सिपाही जब मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचा तो उसके साथ हुआ ऐसा बर्ताव
एक पाले में जा सकते हैं क्षत्रिय बाहुबली
यूपी में क्षत्रिय बाहुबलियों की बात करें तो राजा भैया, ब्रजभूषण शरण सिंह, बृजेश सिंह, धनंजय सिंह, अभय सिंह आदि का नाम सामने आता है। अभय सिंह इस समय सपा में है जबकि बृजभूषण शरण सिंह पहले से ही बीजेपी के सांसद हैं। राजा भैया व सीएम योगी आदित्यनाथ की नजदीकी किसी से छिपी नहीं है। माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह को भी गृहमंत्री राजनाथ सिंह का करीबी माना जाता है ऐसे में लोकसभा चुनाव २०१९ होगा तो एक तरफ बीजेपी होगी और दूसरी तरफ महागठबंधन। ऐसे में क्षत्रिय बाहुबली एक खेमे में जा सकते हैं जबकि दूसरे खेमे में मुख्तार अंसारी, अभय सिंह आदि बाहुबली चुनावी मैदान में ताल ठोंकने को तैयार होंगे।
यह भी पढ़े:-छह माह से दे रहा था नौकरी दिलाने का झांसा, रेप के आरोप में बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष को रंगे हाथ पकडऩे के बाद छूटे पुलिस के पसीने
Published on:
25 May 2018, 12:21 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.