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मुन्ना बजरंगी की मौत के बाद बाहुबलियों ने बदली रणनीति, लोकसभा चुनाव में यह बन रहा समीकरण

बीजेपी व महागठबंधन में होना है सीधा मुकाबला, टिकट को लेकर ऐसी चल रही सेटिंग
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 20 Jul 2018, 12:24 PM IST

Bahubali leader

Bahubali leader

वाराणसी. सभी दलों ने लोकसभा चुनाव की तैयारी कर दी है। यह बात साफ है कि बीजेपी व महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होगा। अन्य नेताओं की तरह बाहुबली भी चुनाव में अपने भाग्य आजमाने की तैयारी की है। सुपारी किंग मुन्ना बजरंगी भी जौनपुर लोकसभा सीट से चुनाव लडऩा चाहता था लेकिन बागपत जेल में उसकी हत्या होने के बाद से बाहुबलियों का सियासी समीकरण बदल गया है। बाहुबलियों ने अपनी पसंद की सीट को लेकर चुप्पी साध ली है ताकि विरोधी चुनावी लाभ के चलते उन पर हमला न कर पाये।
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पूर्वांचल के बाहुबली पहले भी चुनाव लड़ते आये हैं। सपा, बसपा, कांग्रेस व बीजेपी में से किसी एक दल से उन्हें टिकट मिल भी जाता था लेकिन इस बार कहानी कुछ और ही है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव व मायावती ने महागठबंधन करने की तैयारी की है जिससे बाहुबलियों को बड़ा झटका लग गया है। महागठबंधन होने पर तीनों दलों को अधिक सीट नहीं मिलेगी। ऐसे में महागठबंधन से बाहुबलियों को पसंद की सीट मिलना बेहद कठिन हो गया है। बीजेपी किस बाहुबली को टिकट दे सकती है इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है। बाहुबली नेता भी जानते हैं कि बीजेपी व महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होना है ओर इस मुकाबले में किसी छोटे दल के टिकट से चुनाव लडऩा समझदारी का फैसला नहीं होगा।
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इन बाहुबलियों की राह में आ सकती है अड़चन
कुंडा विधायक राजा भैया संसदीय चुनाव नहीं लड़ते हैं लेकिन उनके भाई अक्षय प्रताप सिंह को लोकसभा चुनाव लडऩा पसंद है। राजा भैया व सीएम योगी आदित्यनाथ की नजदीकी को देखते हुए अक्षय प्रताप सिंह के लिए बीजेपी का टिकट पहली पसंद हो सकती है यदि टिकट नहीं मिला तो महागठबंधन से समर्थन मिलना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी व बेटे अब्बास अंसारी लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। अंसारी परिवार को न्यूनतम एक टिकट बसपा सुप्रीमो मायावती दे सकती है। अखिलेश यादव से मतभेद हो जाने के बाद मुख्तार अंसारी बसपा में शामिल हो गये थे। जौनपुर के बाहुबली धनंजय सिंह का समीकरण फंसता नजर आ रहा है। लोकसभा चुनाव के लिए धनंजय सिंह को बीजेपी से समर्थन नहीं मिल रहा है जबकि महागठबंधन में ऐसे नेता पहले से शामिल है जो जौनपुर सीट के लिए अपना दावा कर रहे हैं। इस परिस्थिति में धनंजय सिंह के लिए बड़े दल का टिकट पाना कठिन हो सकता है। इलाहाबाद के बाहुबली अतीक अहमद की राह सबसे कठिन दिख रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती की नाराजगी खत्म हुई तो महागठबंधन से टिकट मिल सकता है। बीजेपी व सपा से अतीक के रिश्ते खराब हो चुके हैं ऐसे में अतीक अहमद ने पहले ही नयी पार्टी बनाने की घोषणा की थी। संभावना है कि वह अपने नये दल से ही लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह भी लोकसभा चुनाव में लड़ सकते हैं। बीजेपी सिंह परिवार की बीजेपी से नजदीकी किसी से छिपी नहीं है। बृजेश सिंह पहले ही एमएलसी है जबकि उनके भतीजे सुशील सिंह बीजेपी से विधायक है ऐसे में बृजेश सिंह को भाजपा का साथ मिल सकता है। भदोही के बाहुबली विजय मिश्रा का संबंध बीजेपी से ठीक हो गया है यदि विजय मिश्रा का समीकरण काम करता है तो उनकी बेटी को भगवा दल से टिकट मिल सकता है।

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चुनावी सीट को लेकर बरत रहे हैं गोपनीयता
कुछ बाहुबली नेता चुनावी सीट को लेकर अब बेहद गोपनीयता बरत रहे हैं। मुन्ना बजरंगी की हत्या ने ऐसे नेताओं को रणनीति बदलने पर विवश कर दिया है। बाहुबली नेता चुनावी सीट को लेकर खुलासा करने से बच रहे हैं ताकि कोई और बाहुबली उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सके। खास लोगों के जरिए वह विभिन्न दलों सेेटिंग बनाने में व्यस्त है एक बार सीट पक्की होने की गारंटी मिलेगी। तभी वह अपनी सीट का खुलासा करेंगे। ऐसे उनके विरोधी बाहुबली को चुनावी सीट को लेकर नुकसान पहुंचाने का मौका नहीं मिल पायेगा।
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