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थाना प्रभारियों को बचाने के लिए ली जा रही सिपाहियों की बलि

पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में गजब का हो रहा खेल, जानिए क्या है कहानी
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 8 Oct 2018, 2:43 PM IST

UP Police

UP Police

वाराणसी. लखनऊ में शूटआउट में विवेक तिवारी की जान लेने के बाद भी यूपी पुलिस की व्यवस्था नहीं बदल रही है। पुलिस की हालत यह हो गयी है कि अनुशासित माने जाने वाले कर्मचारी भी हत्यारोपी सिपाही प्रशांत चौधरी व संदीप के समर्थन में जिस तरह से काली पट्टी बांध कर फोटो को सोशल मीडिया पर वायरल किया था उससे डीजीपी ओपी सिंह को बड़ा झटका लगा था।। पुलिस अधिकारियों ने विरोध करने वाले सिपाहियों व दरोगा पर कार्रवाई शुरू की है। बड़ा सवाल है कि आखिकर दो हत्यारोपी सिपाहियों के लिए पुलिस में इतना समर्थन क्यों है। इसकी बड़ी वजह सिपाहियों का अंसतोष है जो अब बाहर निकल रहा है। पुलिस अधिकारी अपने खास लोगों को बचाने के लिए सिपाहियों की बलि तो चढ़ा देते हैं। जिसका परिणाम हो रहा है कि पुलिस का अनुशासन अब खत्म होने लगा है।
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पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस की दो घटना ने पुलिस पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। थाना प्रभारी व थानाध्यक्ष पर अपने निर्धारित क्षेत्र की जिम्मेदारी होती है यहां तक की थाने में क्या गलत हो रहा है इसका जवाबदेह भी थाना प्रभारियों को माना जाता है। पुलिस के बड़े अधिकारियों के आशीर्वाद से ही थाना मिलता है इसलिए माना जाता है कि थाना प्रभारी अधिकारियों के चहेते होते हैं। मिर्जामुराद थाना में कुछ दिन पहले एक ऑडियो वायरल हुआ था जिसमे पशु तस्कर व थाने के कारखास की बात थी जो पैसे लेकर पशु से भरे ट्रक को छुड़ाने की बात कह रहे थे ऑडियो में कारखास साफ बोल रहा था कि साहब नाराज है। यहां पर साहब का मतलब थाना प्रभारी से लगाया जा रहा है। ऑडियो जब वायरल हुआ तो कैंट सीओ से जांच करायी गयी। जांच रिपोर्ट आने के पहले ही कारखास व थाना प्रभारी को हटा दिया गया था रिपोर्ट मिलने के बाद कारखास पर मुकदमा दर्ज करके उसे जेल भेज दिया गया। जबकि थाना प्रभारी को निलंबित किया गया था। बड़ा सवाल कि थाने में पशु से भरे ट्रक को पकड़ कर वसूली हो रही थी दो दिन से ट्रक को रोक कर रखा गया था ऑडियो वायरल होने के बाद पशु तस्करों की गिरफ्तारी दिखायी गयी थी इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी पर मुकदमा दर्ज नहीं होता है सिर्फ निलंबित करके उन्हें बचा दिया जाता है।
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यहां भी सिपाहियों की बलि चढ़ा कर थाना प्रभारी को बचाया गया
रोहनिया थाना क्षेत्र में बंद पड़े आईटीआई कॉलेज से शराब बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गयी थी। शिवपुर पुलिस ने इस मामले का खुलासा नहीं किया होता तो यह राज सबके सामने नहीं आता। फैक्ट्री मिलने के बाद आबकारी विभाग ने दरोगा समेत सात सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया था जबकि एक सिपाही को छोड़ दिया गया था जिसको लेकर निलंबित सिपाहियों ने नाराजगी जतायी थी। एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने रोहनिया थाने से तीन सिपाहियों को लाइन हाजिर किया गया था जबकि थाना प्रभारी का दूसरे विभाग में तबादला हो गया था। बड़ा सवाल है कि आखिर थाना प्रभारी पर कार्रवाई क्यों नहीं की गयी। जबकि थाना प्रभारी की सबसे पहले इस मामले में जवाबदेही होनी चाहिए थी। पुलिस अधिकारियों का चहेते थाना प्रभारियों को बचाने की मुहिम से विभाग में नाराजगी हो रही है जिसका असर आने वाले दिनों में दिखायी पड़ सकता है।
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