25 अक्टूबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सारी ताकत लगाने के बाद भी बीजेपी नहीं खोज पायी इन नेताओं का विकल्प, लोकसभा चुनाव में देनी होगी सीट

यूपी के पूर्व सीएम राजनाथ सिंह के समय हाशिय पर भेज दिये गये थे यह नेता, भगवा दल अब तक तैयार नहीं कर पाया विकल्प
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

वाराणसी

•

image

Devesh Singh

•

Updated: 29 Mar 2018, 4:28 PM IST

Amit Shah

Amit Shah

वाराणसी. यूपी चुनाव 2017 व गोरखपुर व फूलपुर में हुए उपचुनाव। दोनों चुनाव का परिणाम अलग-अलग था लेकिन दोनों ही चुनाव में एक बात कॉमन थी। इन चुनाव परिणाम में विकास की जगह सोशल इंजीनियरिंग की जीत हुई थी। अब लोकसभा चुनाव आने वाला है। सभी दलों ने अपनी सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करना शुरू कर दिया है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी बीजेपी को हो रही है। भगवा पार्टी ने सारी ताकत लगा ली लेकिन इन नेताओं का विकल्प तैयार नहीं हो पाया।
यह भी पढ़े:-वरुणा कॉरीडोर तक आ सकती है ईडी जांच की आच, निर्माण में हुआ है जमकर खेल



IMAGE CREDIT: Patrika

यूपी में कल्याण सिंह सरकार के समय बीजेपी की स्थिति सबसे मजबूत थी। सपा व बसपा ने मिल कर चुनाव लड़ा था लेकिन बीजेपी से अधिक सीट नहीं मिली थी उसके बाद यूपी की सत्ता राजनाथ सिंह ने संभाली थी। राजनाथ सिंह के समय ही करीने से कद्दावर नेता ओमप्रकाश सिंह को किनारे किया गया था उसके बाद प्रदेश की स्थिति ऐसी बन गयी थी कि यूपी में सपा व बसपा का राज रहा। कभी मुलायम तो कभी अखिलेश ने राज किया। सपा जब कमजोर हुई तो मायावती ने शासन संभाला था अब स्थिति बदल गयी है। पीएम नरेन्द्र मोदी की लहर रोकने के लिए सपा व बसपा एक साथ आ गये हैं। गठबंधन के तहत दोनों दलों में किसे कितनी सीट मिलती है यह समय ही बतायेगा। इतना तो साफ हो गया है कि सीट बंटवारे को लेकर बीजेपी को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ेगी।
यह भी पढ़े:-यह वह पांच कारण है जो सीएम योगी पर उठा रहे बड़ा सवाल, बैकफुट पर आयी बीजेपी

बीजेपी तैयार नहीं कर पायी इन दो नेताओं का विकल्प
बीजेपी ने यूपी में ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा व अनुप्रिया के अपना दल से गठबंधन किया है। सुभासपा को राजभरों की पार्टी माना जाता है और अपना दल को पटेल वर्ग की। बीजेपी ने इन दलों के बराबर खड़ा करने के लिए दो नेताओं पर दांव लगाया था। शिवपुर से बीजेपी विधायक अनिल राजभर व फूलपुर से बीजेपी प्रत्याशी कौशलेन्द्र पटेल। बीजेपी के यह दो नाम ऐसे हैं जिस पर सबकी निगाहे लगी है। बीजेपी के ताकत लगाने के बाद भी अनिल राजभर इतनी ताकत नहीं दिखा पाये हैं कि वह ओमप्रकाश राजभर का विकल्प बन सके। बीजेपी को लगा था कि बिना अपना दल के सहयोग लिए ही पटेल बाहुल्य सीट फूलपुर से कौशलेन्द्र सिंह पटेल को चुनाव जीता देंगे तो अपना दल का विकल मिल जायेगा। बीजेपी के पास भी ऐसा पटेल नेता होगा जो लोकसभा चुनाव में पटेल वोटरों को भाजपा के पक्ष में करने में कामयाब रहेंगे। फूलपुर से कौशलेन्द्र पटेल चुनाव हार गये और अनिल राजभर भी राजभर वोटरों का विकल्प नहीं बन पाये हैं अब बीजेपी के पास सहयोगी दलों को सीट देने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचा है।
यह भी पढ़े:-राज्यसभा चुनाव में इन बाहुबलियों ने खुल कर दिया था बीजेपी का साथ, अब लोकसभा चुनाव में मिलेगा ईनाम

लोकसभा चुनाव में छोटी-छोटी जातीय संगठन भी दिखायेंगे ताकत, बड़े दल होंगे नतमस्तक
लोकसभा चुनाव 2019 में छोटी-छोटी जाति वाले दल भी अपनी ताकत दिखायेंगे और बड़े दल उनके आगे नतमस्तक होंगे। अखिलेश यादव ने पटेल के साथ निषाद व चौहान समाज को सपा से जोड़ा है। जबकि मायावती के साथ दलित वर्ग पहले से हैं। इसके अतिरिक्त बचे हुए छोटे जातीय दल भी बड़े पार्टी से जुडऩे के लिए बेकरार है ऐसे में साफ हो जाता है कि इस बार लोकसभा चुनाव में बड़े दलों को छोटे दलों के साथ सीट बंटवारा करना ही होगा। या फिर अपने दल में शामिल करके प्रत्याशी बनाना होगा।
यह भी पढ़े:-राज्यसभा में क्रास वोटिंग पर सुभासपा का बड़ा खुलासा, कहा बीजेपी कराये अपने विधायकों का नार्को टेस्ट

बड़ी खबरें

View All

वाराणसी

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग