
PM Narendra Modi and Amit Shah
वाराणसी. सपा व बसपा गठबंधन से झटका देने के लिए बीजेपी ने नया दांव खेलने की तैयारी की है। यदि बीजेपी का दांव सफल हो जाता है तो सपा व बसपा गठबंधन का वोट बैंक दरक सकता है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार की तरह बीजेपी की सत्ता बरकरार रह सकती है।
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बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार ने बड़ा दांव खेल था जिसके चलते आज तक उन्हें सत्ता से हटाना संभव नहीं हो पाया है। नीतीश कुमार ने आरक्षण में ही अति पिछड़े व अति दलित वर्ग को अलग कर ऐसे लोगों को लाभ दिया था नतीजा हुआ कि लालू यादव के पास एक ही जाति का बड़ा वोट बैंक रह गया। पिछड़े व अति दलित के कई वर्ग के लोग सीधे जदयू से जुड़ गये। बीजेपी ने इसी तर्ज पर दांव खेलने की तैयारी की है। सब कुछ सही रहता है तो लोकसभा चुनाव २०१९ के पहले पिछड़ा व दलित वर्ग के आरक्षण को तीन भाग में बांट सकती है। बीजेपी के सहयोगी दल ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा ने लंबे समय से यह मांग की है। बीजेपी जानती है कि सपा व बसपा गठबंधन होने पर दोनों दलों की सोशल इंजीनियरिंग में सेंधमारी करना कठिन है इसलिए आरक्षण का नया दांव खेलने की तैयारी की गयी है।
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सपा की बदली रणनीति से परेशान है बीजेपी
सपा की बदली रणनीति से बीजेपी परेशान है। गोरखपुर में निषाद व फूलपुर में पटेल जाति का प्रत्याशी उतार कर सपा ने नये संकेत दिये हैं। सपा पर मुस्लिम व यादव प्रत्याशी को अधिक टिकट देने का आरोप लगता रहता है ऐसे में पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने मीडिया में यह बयान दिया था कि अब उनकी सरकार नहीं है इसलिए जो समय मिला है उसमे पार्टी के सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करेंगे। बसपा सुप्रीमो मायावती ने पहले ही सपा से गठबंधन करने का बयान दिया है ऐसे में बीजेपी के पास अति पिछड़े व अति दलित कार्ड खेलने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं है।
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जानिए बीजेपी को कैसे हो सकता है लाभ
सपा के पास यादव तो बसपा को पास जाघव वोटरों का बड़ा वोट बैंक हैं इसके अतिरिक्त पिछड़ा व दलित वर्ग में बची हुई जातियों ने वर्ष 2014 व 2017 में बीजेपी का साथ दिया था जिसके चलते बीजेपी को बड़ा बहुमत मिला है। सीएम योगी सरकार से यही वर्ग अब नाराज होने लगा है, ऐसे में बीजेपी को अपना वोट बैंक दरकता हुआ दिख रहा है। सपा व बसपा ने अपने कैडर वोटरों के अतिरिक्त अन्य जातियों के नेता को महत्व देना शुरू कर दिया है जिसके चलते बीेजपी परेशान है। बीजेपी के पास अति पिछड़ा व अति दलित वोटरों को साधने के लिए नया आरक्षण कार्ड है। यूपी के पूर्व सीएम राजनाथ सिंह ने भी यही आरक्षण कार्ड खेलने की कोशिश की थी लेकिन केन्द्र में कांग्रेस सरकार होने के चलते बीजेपी यह कार्ड नहीं खेल पायी थी अब केन्द्र में पीएम मोदी की सरकार है इसलिए बीजेपी आराम से यह कार्ड खेल सकती है। खास बात है कि नया आरक्षण कार्ड खेलने से सवर्णों को परेशानी नहीं होगी। वह जानते हैं कि आरक्षण की जो मौजूदा स्थिति में है उसमे नया कार्ड खेलने से बदलाव नहीं होगा।
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Published on:
14 Apr 2018, 7:24 PM IST
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