
वाराणसी. संसदीय चुनाव 2019 की तैयारी में जुटी बसपा में घमासान मच चुका है। संसदीय चुनाव 2014 व यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में मिली हार के बाद भी बसपा नेताओं की आदत में सुधार नहीं हो रहा है। पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में बसपा की बैठक में नेताओं के समर्थकों ने एक-दूसरे पर जमकर ईंट-पत्थर व कुर्सियां चलायी। बैठक में बवाल की सूचना पर पहुंची पुलिस ने बसपा नेताओं व समर्थकों को समझा कर शांत कराया। खास बात तो यह है कि बसपा नेता व समर्थकों खुद ही भिड़ गये हैं, जबकि कुछ नेताओं ने इसे बीजेपी व राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) की साजिश बताया है।
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बसपा ने कुछ दिनों ही संगठन में फेरबदल किया है। इसी बात को लेकर बसपा के अंदर चिंगारी सुलग रही थी तो सारनाथ में हुई बैठक में आग में बदल गयी। बसपा के कोआर्डिनेटर डा.रामकुमार कुरील की मौजूदगी में बसपा की बैठक हुई थी। इसी बीच पूर्व जिलाध्यक्ष दीपचंद चौधरी व वर्तमान जिलाध्यक्ष लक्ष्मण राम के समर्थकों में किसी बात को लेकर विवाद हो गया। पूर्व जिलाध्यक्ष के समर्थकों ने कहा कि वर्तमान जिलाध्यक्ष चंदौली के है, ऐसे में उनकी जिम्मेदारी बनारस के ही किसी कार्यकर्ता को दी जाये। कुछ समर्थकों ने यह भी कह दिया कि पूर्व जिलाध्यक्ष को ही वर्तमान जिलाध्यक्ष का पद सौंप दिया जाये। इसी बात को लेकर बसपा के नये जिलाध्यक्ष के समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते बात बिगड़ गयी ओर दोनों पक्षों में ईंट-पत्थर व कुर्सियां चलने लगी। बसपा नेताओं ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसी बीच वहां की स्थिति जब गंभीर होने लगी तो सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला।
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कई कार्यकर्ताओं को रास नहीं आ रहा संगठन में बदलाव
बीएसपी के कई कार्यकर्ताओं को संगठन में बदलाव रास नहीं आ रहा है, जिसके चलते बसपा नेताओं में मतभेद उभरने लगे है। बसपा सुप्रीमो मायावती ? ने पार्टी के सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को लोक सभा चुनाव 2019 में जुट जाने को कहा है, लेकिन बसपा अभी कार्यकर्ताओं के मतभेद से ही नहीं उबर पा रही है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक बसपा नेता ने कहा कि पार्टी का अखिलेश यादव की सपा से गठबंधन हो जाता है तो स्थिति बिगड़ सकती है। बहुत से बसपा नेता ऐसे हैं जो वर्षों से पार्टी का जनाधार बढ़ाने में जुटे हुए हैं। ऐसे में गठबंधन के तहत बसपा व सपा में सीटों का बंटवार होगा तो कई बसपा नेताओं के टिकट कट जायेंगे। इन परिस्थितियों में पुराने बसपा नेताओं का भी रोष बढ़ सकता है।
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