30 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

#KeyTo Success-नेत्र सर्जन की सफलता की कहानी बता रहा अपना घर आश्रम

सीएम योगी आदित्यनाथ भी देख चुके हैं आश्रम, बिना किसी आर्थिक मदद लिये कर रहे मानवता की सच्ची सेवा
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

वाराणसी

•

image

Devesh Singh

•

Updated: 22 Nov 2019, 8:50 AM IST

Dr. K Niranjan

Dr. K Niranjan

वाराणसी. सफल जीवन के लिए दो पहलू होते हैं। किसी के लिए सर्वोच्च स्थाना पान ही सफलता होता है तो कोई मानवता की सच्ची सेवा करना ही सफलता मानता है। बनारस के एक चिकित्सक ने जीवन में दोनों ही जगहों पर सफलता पायी है। पहले नेत्र सर्जन बन कर खुद को साबित किया। इसके बाद बेसहारा व बीमारों के लिए अपना घर आश्रम खोल दिया। बिना किसी से आर्थिक मदद लिए ही वह आश्रम चला रहे हैं। आश्रम में लोगों का इलाज करने के साथ ही उन्हें रहने की सुविधा, भोजन व वस्त्र तक मिलता है।
यह भी पढ़े:-#KeyTo Success -डबल गोल्ड मेडल पायी टॉपर पूजा की जुबानी, सफलता पाने की कहानी

नेत्र सर्जन डा.के निरंजन के आश्रम को देखने खुद सीएम योगी आदित्यनाथ तक गये थे और वहा की व्यवस्था से बहुत संतुष्ट दिखे थे। डा.के निरंजन ने बताया कि सड़कों पर घुमते हुए लावारिस, असहाय व बीमारी को देखते थे तो बहुत दुख होता था एक दिन उनके मन में विचार आया कि ऐसे लोगों के लिए आश्रम बनाया जाये। विचार आने से ही बहुत संतुष्टि मिली। लगा कि जब आश्रम बन जायेगा तो कितना अच्छा महसूस होगा। चिकित्सक पत्नी डा.कात्याननी से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि दो अस्पताल पहले से चल रहे हैं आश्रम में कैसे काम किया जायेगा। पत्नी से कहा कि भगवान से ही विचार दिया है तो भगवान ही आश्रम को चलायेंगे। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने भरतपुर राजस्थान के डा.बी भारद्वाज से सम्पर्क किया। वह 20 साल से ऐसा आश्रम चला रहे हैं। उनसे सारी व्यवस्था जानने के बाद अक्टूबर 2018 में आश्रम की स्थापना की। इसके बाद सैकड़ों लावारिस व बीमार लाये जा चुके हैं। कुछ लोगों को ठीक करके उनके घर वापस भेजा जा चुका है। जिनका कोई ठिकाना नहीं है वह आश्रम में रहते हैं। उन्होंने बताया कि सभी धर्म के लोग आश्रम में रहते हैं यदि किसी का निधन हो जाता है तो उसके धर्म के अनुसार ही अंतिम क्रिया की जाती है। डा.के निरंजन ने बताया कि अपने अस्पताल में भी रहता हूं तो आश्रम की चिंता रहती है और आश्रम का काम कभी नहीं रुका है क्योंकि इस काम को मैं बोझ नहीं मानता हूं। आश्रम को धरातल पर उतारने के बाद बहुत खुशी मिली है लगा कि जरूरतमंदों की सेवा करना ही जीवन की असली सफलता है।
यह भी पढ़े:-#KeyToSuccess -खुद के घर को बना दी कबीर कुटिया, अमन यादव के जज्बे को सभी करते हैं सलाम

बड़ी खबरें

View All

वाराणसी

उत्तर प्रदेश