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वाराणसी. बीजेपी के राष्र्टीय अध्यक्ष व पार्टी के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह ने अभी से लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी शुरू कर दी है। पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस से सोशल मीडिया के जरिए घर-घर तक भगवा दल के विकास कार्य को पहुंचाने का संदेश दिया जा चुका है। यह बात लगभग तय हो चुकी है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी का सीधा मुकाबला महागठबंधन से होना तय है। पांच ऐसे कारण हैं, जिसके चलते बीजेपी को विरोधी दलों पर बढ़त मिल जाती है।
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पीएम नरेन्द्र मोदी व अमित शाह की जोड़ी ने गुजरात के बाद देश में अपना जादू दिखाया है। बिहार, दिल्ली आदि राज्यों को छोड़ दिया जाये तो अधिकतर जगह पर बीजेपी को जीत मिली है। बीजेपी के जीत के पीछे अमित शाह की रणनीति होती है तो पार्टी का चेहरा पीएम नरेन्द्र मोदी होते हैं। लोकसभा चुनाव 2019 में विरोधी दल का मुख्य मुकाबला बीजेपी की इसी जोड़ी से होने वाला है। यदि लोकसभा चुनाव में महागठबंधन को विजय मिलती है तो फिर मोदी युग अंधकार में चला जायेगा। यदि बीजेपी को जीत मिलती है तो पीएम नरेन्द्र मोदी का नाम इतिहास में दर्ज हो जायेगा।
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तकनीक का प्रयोग
लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी ने दिखाया था कि किस तरह तकनीक का प्रयोग करके लोगों तक अपनी बात पहुंचायी जा सकती है। इस चुनाव में बीजेपी ने सोशल मीडिया का जितना उपयोग किया था उतना अन्य दल नहीं कर पाये थे। आज की बात की जाये तो सोशल मीडिया पर सबसे मजबूत टीम बीजेपी की है जबकि अन्य दलों ने भी इस प्लेटफार्म पर अब सक्रियता बढ़ायी है।
सोशल इंजीनियरिंग पर पकड़
बीजेपी ने अभी तक के चुनाव में जिस तरह से सोशल इंजीनियरिंग पर अपनी पकड़ दिखायी है उतना काम अन्य दल नहीं कर पाये हैं। अखिलेश यादव ने खुद कहा था कि अब वह प्रदेश के सीएम नहीं है इसलिए खाली समय में पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने में लगा रहे हैं। विरोधी दल अपने सोशल इंजीनियरिंग को ही मजबूत करने के लिए महागठबंधन बनाने में जुटे हैं।
हिन्दुत्व का कार्ड
बीजेपी जितना अधिक हिन्दुत्व का कार्ड खेलती है उतना अन्य दल नहीं खेल पाते हैं। खास बात है कि बीजेपी जब तुष्टिकरण करती है तो भी विरोधी दल अपने वोट बैंक के लिए उसे बड़ा मुद्दा नहीं बना पाते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजों से मुकदमा वापस लेना है यदि यही काम अन्य दल करते तो बीजेपी इसे बड़ा मुद्दा बना लेती, लेकिन विरोधी दल ऐसा करने में विफल रहे।
बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की फौज
बीजेपी के पास बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की फौज है। चुनाव के समय बीजेपी को आरएसएस के स्वंयसेवकों की भी ताकत मिल जाती है। पन्ना प्रमुख से लेकर एक-एक बूथ की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं को सौंपी जाती है। कार्यकर्ताओं की इतनी संगठित फौज अन्य किसी दल के पास नहीं है। राहुल गांधी भी कांग्रेस के सेवादल को मजबूत करने में विफल साबित हो रहे हैं।
स्थानीय आक्रोश व मुद्दों की जानकारी
चुनाव जीतने के बाद भ बीजेपी लगातार कार्यक्रम चलाती रहती है जिससे उससे स्थानीय मुद्दे व जनता का आक्रोश व सराकर की फीडबैक मिलती रहती है इसके आधार पर बीजेपी अपनी रणनीति तय करती है जो पीएम नरेन्द्र मोदी के भाषणों में भी दिख जाती है। इसके विपरित अन्य दल जनता से जुडऩे वाले कार्यक्रम में इतनी सक्रियता नहीं दिखा पाते हैं।
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Published on:
6 Jul 2018, 1:03 PM IST
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