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पांच बड़े सवाल जिससे खुश होगी बीजेपी और महागठबंधन को लगेगा झटका

उपुचनाव में मिली है सफलता, लोकसभा 2019 में होगी असली परीक्षा
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वाराणसी

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Devesh Singh

•

Updated: 4 Jun 2018, 1:33 PM IST

Mega Alliance

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वाराणसी. लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को रोकने के लिए महागठबंन बनना तय है। महागठबंधन ने पहली परीक्षा पास कर ली है और गोरखपुर, फूलपुर व कैराना चुनाव में बड़ी जीत मिली है जिसके बाद से बीजेपी भी बैकफुट पर आ गयी है। महागठबंधन की असली परीक्षा 2019 में होगी। उसके बाद ही पता चलेगा कि किसको जीत मिलती है। ऐसे में पांच बड़े सवाल है जो बीजेपी को राहत देने के साथ महागठबंधन के लिए झटका साबित हो सकते हैं।
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1-महागठबंधन का नेता कौन
पीएम नरेन्द्र मोदी के बल पर ही बीजेपी ने इतने राज्यों में चुनाव जीता है। जहां पर भगवा दल के चुनाव हारने की संभावना होती है वहां पर भी जाकर पीएम मोदी बाजी पटल देते हैं ऐसे में महागठबंधन के लिए बड़ा सवाल है कि पीएम पद का प्रत्याशी कौन होगा। पहले इस रेस में नीतीश कुमार सबसे आगे थे लेकिन अब वह भी बीजेपी के सहयोगी दल बन गये हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को छोड़ दिया जाये तो कोई भी ऐसा नेता नहीं दिखता है जो देश भर की जनता को स्वीकार हो सकता है।
2- टिकट कटने से नाराज बागी भी बिगाड़ सकते हैं खेल
महागठबंधन में कांग्रेस के अलावा अखिलेश यादव , मायावती , आरएलडी के अजीत सिंह भी शामिल है और चुनाव तक छोटे जातिगत दल भी शामिल हो सकते हैं ऐसे में सपा व बसपा जैसे बड़े दलों को भी अधिक सीट नहीं मिलने वाली है दोनों दलों के जिन नेताओं का टिकट कटेगा वह बगावत कर सकते हैं यदि ऐसा हुआ तो महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
3-कार्यकर्ता भी स्वीकार करेंगे महागठबंधन
उपचुनाव में महागठबंधन को जीत मिली है इसलिए माना जा रहा है कि सपा व बसपा के कैडर वोटरों को गठबंधन पसंद आया है ऐसे में बड़ा सवाल है कि लोकसभा चुनाव में भी यह साथ बना रहेगा। सपा व बसपा के शासकाल में यादव व जाधव वोटरों की राजनीतिक रंजिश किसी से छिपी नहीं है। दोनों ही दलों के अन्य पिछड़ी जाति का भी वोट मिलता है ऐसे में महागठबंधन प्रत्याशी को जिताने में सभी दलो के कैडर वोट एक होंगे। यह बड़ा सवाल है यदि वोटर को साथ नहीं पसंद आया तो महागठबंधन की परेशानी बढऩा तय हे।
4-सिंबल देकर वोट देती है ग्रामीण जनता
ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी आबादी आज भी पार्टी का सिंबल देकर वोट देती है। सभी राजनीतिक दलों के लोग इन वोटरों को सिंबल की अधिक जानकारी देते हैं ऐसे लोगों के लिए यह मायने नहीं रखता है कि किस नाम का व्यक्ति किस दल से खड़ा है। मतदान के दिन वह सिंबल देकर वोट देने में विश्वास रखते हैं। बड़ा सवाल है कि ऐसे वोटरों को अपनी पार्टी का सिबंल नहीं मिला तो वह अन्य किस दल को वोट देंगे यह बड़ा सवाल है
5-लोकसभा चुनाव में जीत व हार के बाद भी जारी रहेगा महागठबंधन
बड़ा सवाल है कि लोकसभा चुनाव में जीत व हार के बाद भी महागठबंधन जारी रहेगा। यूपी में अखिलेश यादव व मायावती ने अपनी राजनीतिक लड़ाई छोड़ कर गठबंधन किया है। इसी तरह जेडीएस, वाम दल, ममता बनर्जी , शरद पावर आदि के दल भी एक होकर बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं यदि महागठबंधन को जीत मिलती है तो सरकार में मंत्री पद को लेकर मतभेद होना तय है यदि हार मिलती है तो आगे भी महागठबंधन जारी रहेगा। इसको लेकर संशय है इसके चलते भी स्थायी सरकार पसंद करने वोटरों के लिए महागठबंधन पहली पसंद नहीं बन पायेगा।
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