
वाराणसी. फ्लाईओवर हादसे को लेकर जिला प्रशासन कितना गंभीर है यह उसकी रिपोर्ट बताती है। चौकाघाट फ्लाईओवर हादसे के कुछ घंटे बाद ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या घटनास्थल पर पहुंचे थे और सारी जानकारी लेने के बाद सर्किट हाउस में प्रेस कांफ्रेंस में 18 लोगों की मौत होने की बात कही थी जबकि डिप्टी सीएम के जाते ही जिला प्रशासन ने 15 लोगों की मौत होने की बात मानी है और आनन-फानन में इतने लोगों को मुआवजा भी दे दिया गया है। घटनास्थल पर लगी एनडीआरएफ ने खुद 18 शव निकालने का दावा किया है इससे साफ हो जाता है कि मौत के बाद भी अंाकड़ों की बाजीगरी हुई है जबकि कई लोगों का आरोप है कि उधर से जाने वाले उनके परिजन अभी तक लापता है।
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फ्लाईओवर हादसे में आधा दर्जन से अधिक छोटे व बड़े वाहन दबे थे। घटना के तुरंत बाद मलबे में 50 लोगों को दबे होने की आशंका जतायी जा रही थी। घटनास्थल पर इतनी अधिक भीड़ थी कि वहां से किसी की लाश या घायल व्यक्ति को गायब करना संभव नहीं था। मौके पर पहुंची एनडीआरएफ की टीम मृतक व घायल को निकालने में जुटी थी और जैसे ही मलबे से कोई बाहर निकाला जाता था। उसे तुरंत ही एम्बुलेंस से अस्पताल भेजा जाता था। मौके पर उपस्थित सेना के एक अधिकारी ने भी 50 लोगों के दबे होने की बात कही थी लेकिन जब जिला प्रशासन ने मृतकों का आंकड़ा जारी किया तो वह 15 हो गया। आश्चर्य की बात है कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने प्रेस कांफ्रेंस में मृतकों की संख्या 18 बतायी थी। डिप्टी सीएम को जिला प्रशासन ने गलत जानकारी दी थी या फिर उन्हें कही अन्य से 18 मौतों की जानकारी मिली थी। फ्लाईओवर हादसे के बाद मृतकों की संख्या में अंतर को लेकर सरकारी मिशनरी पर बड़ा आरोप लग रहा है।
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कई लोगों का आरोप नहीं मिल रहे परिजन
कई लोगों का आरोप है कि उनके परिवार के सदस्य इस रास्ते से नियमित आते-जाते थे लेकिन हादसे के बाद से उनका पता नहीं चल रहा है आखिर वह कहां गये। क्या हादसे के बाद उनके शव नहीं मिले या फिर इतने खराब हो गये थे कि वह लापता श्रेणी में आ गये।
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घटना के दूसरे दिन ही मृतकों को दे दिया गया मुआवजा
फ्लाईओवर हादसे के बाद पोस्टमार्टम हाउस में परिजनों से शव के नाम पर अवैध वसूली की गयी थी तो उस समय जिला प्रशासन कही नहीं था। वीडियो वायरल हुआ तब जाकर जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा कर उसे जेल भेजवाया। आश्चर्य की बात है कि घटना के 24 घंटे के अंदर ही जिला प्रशासन ने 15 मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख मुआवजा बांट दिया। इतनी जल्दी सभी कागजी कोरम पूरा कैसे हो गये। इस पर भी सवाल उठने लगा है। कुल मिला कर कहा जाता सकता है कि पीएम नरेन्द्र मोदी के वीवीआईपी संसदीय क्षेत्र में हुए भयानक हादसे में मृतकों की संख्या के अलग-अलग आंकड़ों ने सारी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।
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