
वाराणसी. राज्यपाल राम नाइक ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर अध्यादेश लाने पर कहा कि यह केन्द्र सरकार का काम है। केन्द्र सरकार इस प्रकरण पर विचार कर सकती है लेकिन राज्यपाल होकर इस मुद्दे पर विचार करना अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर की जाने वाली बात हो जायेगी।
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सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेने के बाद राज्यपाल राम नाइक ने मीडिया से बात की। प्रदेश की खराब कानून व्यवस्था के प्रश्र पर अनसुना कर दिया। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर कहा कि अध्यादेश लाना है यह निर्णय केन्द्र सरकार करेगी और राष्ट्रपति से विचार-विमर्श के बाद ही हो पायेगा। बतौर राज्यपाल मैं इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं कर सकता हूं। साथ ही यह भी कहा कि यह प्रकरण अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए भी कुछ कहना सही नहीं होगा।
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राम मंदिर पर प्राइवेट मेंबर बिल लाने पर दिया यह जवाब
बीजेपी के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा के राम मंदिर मुद्दे पर प्राइवेट मेम्बर बिल लाने व सांसद भरत सिन्हा के समर्थन पर राज्यपाल राम नाइक ने कहा कि पहले प्रक्रिया को जानना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हर सदस्य की अपनी तरफ से लोकसभा व राज्यसभा में विधेयक लाने का अधिकार होता है। विधेयक संविधान के अनुसार है की नहीं। यह लोकसभा व राज्यसभा के अध्यक्ष तय करते हैं। इसके बाद विधेयक को प्रस्तुत किया जाता है। दूसरी प्रक्रिया के तहत ऐसे जितने विधेयक लाये जाते हैं उस पर चिट निकाल कर निर्णय किया जाता है कि किस पर चर्चा करनी है। इसके बाद चर्चा होती है और फिर सरकार निर्णय देती है। राज्यपाल राम नाइक ने कहा कि जब मैं विधायक था तो प्राइवेट मेंबर बिल लेकर आया था वह प्रमोशन ऑफ ब्रेस्ट फीडिंग था। बच्चों के लिए महिलाओं के स्तनपान को प्रोत्साहित करना व बच्चों को बेबी फूड के विज्ञापन पर रोक प्रतिबंध लगाने वाला था। इस विधेयक पर चर्चा हुई और सरकार ने बिल पर हमारी बात मानी गयी। इसके बाद सरकार ने बिल लाने की हामी भरी थी। आजादी के बाद यह पहला प्राइवेट मेंबर बिल था जिस पर कानून बना था।
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