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अखिलेश पर आरोप लगाने वाली सीएम योगी सरकार पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, खुल गयी बीजेपी की कलई

साल भर में ही यूपी सरकार की हो गयी किरकिरी, अपराध मुक्त प्रदेश का नारा हुआ खोखला
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 14 Apr 2018, 12:57 PM IST

CM Yogi Adityanath and High Court

CM Yogi Adityanath and High Court

वाराणसी. अखिलेश सरकार पर आरोप लगाने वाली सीएम योगी सरकार पर हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट की बात से साफ हो गया है कि सपा पर जंगलराज का आरोप लगाने वाली बीजेपी का अपराध मुक्त प्रदेश का नारा खोखला हो चुका है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने विधानसभा चुनाव 2017के प्रचार के समय कई बार हाईकोर्ट की टिप्पणी को लेकर सपा पर निशाना साधा था और कहा था कि यह कारनामे वाली सरकार है अब उनके बनाये गये सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार ने भी बड़ा कारनामा कर दिया है। उन्नाव के बाहुबली विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बचाने के लिए बीजेपी सरकार में जो कारनामा हुआ है, वह सबके सामने आ चुका है।
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हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश डीबी भोसले व न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने उन्नाव गैंगरेप व हत्या प्रकरण पर जनहित सुनवाई के दौरान सरकार पर जो टिप्पणी की है वह यूपी सरकार को शर्मसार करने के लिए काफी है। सीएम का जाति प्रेम अब यूपी की जनता पर भारी पडऩे लगा है। यूपी पुलिस ने कानून को ताख पर रख कर गैंगरेप व हत्या जैसे जघन्य वारदात के आरोपी को बचाने के लिए सारी ताकत लगा दी थी। हाईकोर्ट भी सरकार की भूमिका को समझ चुका था इसलिए उच्च न्यायालय को ऐसी टिप्पणी करनी पड़ी है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने यूपी की जनता से सुशासन देने का वायदा करते हुए वोट मांगा था और यूपी की जनता ने अपने पीएम पर भरोसा करते हुए बीजेपी को प्रचंड बहुमत दिया है। गोरखपुर व फूलपुर चुनाव में मिली हार के बाद भी सीएम योगी सरकार को जनता की ताकत का अहसास नहीं हुआ है और गैंगरेप में बाहुबली विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पकडऩे के लिए कोई तत्परता नहीं दिखायी गयी।
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जानिए हाईकोर्ट ने क्या की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने उन्नाव कांड का सिलसिलवार ब्यौरा देते हुए कहा कि 11 जून से 20 जून 2017 तक सत्रह वर्षीय छात्रा के साथ अवधेश तिवारी, शुभम व बृजेश यादव ने सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपी जमानत में रिहा हो गये। लड़की ने 17 अगस्त को सीएम से विधायक व उसके भाई व अन्य लोगों द्वारा गैंगरेप करने की शिकायत की। सीएम कार्यालय से आदेश जारी होने के बा द भी सीओ ने पीडि़ता की नहीं सुनी। डाक्टर तक ने उसकी जांच नहीं की। पीडि़ता को नौ माह तक न्याय के लिए भटकना पड़ा। पुलिस ने कानून की अनदेखी नहीं करती तो पीडि़ता के पिता की मौत नहीं होती। पीडि़ता ने जब अदालत की शरण ली और कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी तो सब कुछ घटने के बाद 12 अप्रैल 2018 को रिपोर्ट दर्ज की गयी। हाईकोर्ट ने कहा कि विधायक के दबाव में पुलिस ने सीएम कार्यालय का भी निर्देश नहीं माना। पुलिस ने पीडि़ता के परिवार के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली पहुंच गयी। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी देते हुए कहा कि एसआईटी रिपोर्ट पर डाक्टर, सीओ व पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था और मुख्य आरोपी को साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के लिए खुला छोड़ दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने ईमानदारी के साथ कार्रवाई नहीं की।
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