बाहुबली अतीक अहमद से छह गुना अधिक वोटों से चुनाव जीते थे केशव प्रसाद मौर्या

फूलपुर संसदीय सीट पर होने वाले उप चुनाव में बीजेपी को फिर से जादू दोहराने की चुनौती, जानिए क्या है कहानी

By: Devesh Singh

Published: 10 Feb 2018, 02:17 PM IST

वाराणसी. देश की आजादी के बाद पहली बार बीजेपी ने फूलपुर संसदीय सीट पर चुनाव जीता था। वर्ष 2014 में इस सीट पर बीजेपी ने सभी आंकड़ों को ध्वस्त करते हुए पहली बार भगवा लहराया था। बीजेपी के केशव प्रसाद मौर्या को कुल 52.43 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि सपा, कांग्रेस व बसपा के वोटों को जोड़ दिया जाये तो वह लगभग 43 प्रतिशत था। इस सीट पर वर्ष 2004 में बाहुबली अतीक अहमद ने सपा के टिकट से चुनाव जीता था लेकिन केशव प्रसाद मौर्या ने अतीक अहमद से छह गुना अधिक वोट से चुनाव जीत कर बीजेपी को खाता खोला था।
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फूलपुर संसदीय सीट का जातीय समीकरण भी दिलचस्प है। पटेल, ब्राह्मण व मुस्लिम मतदाता किसी भी दल का समीकरण बदल सकते हैं। वर्ष 2014 में बीजेपी ने यहां पर रिकॉर्ड दर्ज किया था। केशव प्रसाद मौर्या को 5 लाख से अधिक वोट मिले थे जबकि द्वितीय स्थान पर रहे सपा के धरम राज सिंह पटेल दो लाख वोट तक नहीं मिले थे। मशहूर क्रिकेटर मोहम्मद कैफ तो मात्र 58 हजार वोटों पर सिमट गये थे। इससे पता चलता है कि उस समय बीजेपी की लहर ने बड़े-बड़े नेताओं के समीकरणों को ध्वस्त कर दिया था। फूलपुर संसदीय सीट पर 11 मार्च को उप चुनाव होने जा रहा है अब बीजेपी की पहले जैसी लहर नहीं है और सपा व बसपा के एक साथ चुनाव लडऩे की अटकले लग रही है। चुनाव परिणाम तो 14 मार्च को आ जायेगा। बीजेपी यहां पर चुनाव हार जाती है तो उससे बड़ा झटका लगेगा। बीजेपी के चुनाव जीतने पर विरोधी दलों की नींद उड़ती तय है।
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कभी कांग्रेस व सपा का गढ़ रही फूलपुर संसदीय सीट
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के चलते ही फूलपुर संसदीय सीट वीवीआईपी मानी जाती है। यहां पर कांग्रेस प्रत्याशियों ने सात बार चुनाव जीता है जबकि सपा को चार बार सफलता मिली है। बीजेपी व बसपा के प्रत्याशियों को एक-एक बार जीत मिली है। इससे साफ हो जाता है कि पटेल, ब्राह्मण व मुस्लिम मतदाताओं को जो लुभाने में सफल हो जाता है उसी दल का यहां पर सिक्का जम जाता है।
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