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पीएम नरेन्द्र मोदी के प्रिय परिसर में ठेका लेने के लिए माफिया में छिड़ी वर्चस्व की जंग

मुन्ना बजरंगी की मौत के बाद गैंग की कमान को लेकर भी छिड़ा है घमासान, करोड़ों के टेंडर के लिए जा चुकी है कई की जान
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 6 Nov 2018, 11:47 AM IST

Mafia

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वाराणसी. पीएम नरेन्द्र मोदी के प्रिय परिसर में ठेका लेने के लिए माफिया में वर्चस्व की जंग छिड़ गयी है। अभी तक मुन्ना बजरंगी का इन ठेकों पर सबसे अधिक नियंत्रण होता था लेकिन बागपत जेल में मुन्ना की मौत के बाद अब उसका ठेका लेने के लिए गैंग में ही घमासान मच गया है।
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पीएम नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र बनारस आते हैं तो डीरेका में ही रात्रि प्रवास करते हैं। डीरेका को पीएम मोदी का प्रिय घर माना जाता है। पीएम मोदी ने कई बार डीरेका की तारीफ भी की है। डीजल रेल कारखाना (डीरेका) का एक सच वहां के टेंडर लेने के लिए माफिया में वर्चस्व की जंग भी है। डीरेका का सबसे अधिक टेंडर मुन्ना बजरंगी गिरोह को मिलता था। मुन्ना बजरंगी जिस ठेकेदार पर हाथ रख देता था उसे टेंडर मिल जाता है। बाद में डीरेका में बबलू राय व डबलू राय की बादशाहत कायम हो गयी थी। माना जाता था कि दोनों भाई को भी मुन्ना बजरंगी का सपोर्ट हासिल था वर्ना वह भी टेंडर नहीं ले सकते थे। सालों से डीरेका में टेंडर को लेकर कुछ ही लोगों का वर्चस्व था लेकिन अब समय बदल गया है। बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की मौत के बाद उसका गैंग कमजोर हो गया है। गैंग के अंदर ही बजरंगी की जगह लेने की होड़ मची है। दूसरी तरफ टेंडर के चलते डीरेका के कर्मचारी नेता टीके मुकेश की हत्या कर दी जाती थी हत्या के आरोप में बबलू राय व डबलू राय जेल में बंद है। डीरेका पर एक साथ मुन्ना बजरंगी व बबलू एंव डबलू राय के हट जाने से यहां के टेंडर पर सभी की निगाहे लग गयी है।
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माफिया गुटों में हो सकती है गैंगवार
बनारस का कानून व्यवस्था की स्थिति अच्छी नहीं है। पचास हजार का इनामी रईस अहमद बनारस में रह रहा था लेकिन पुलिस को इसकी खबर तक नहीं हुई थी। रईस बनारसी की मौत के बाद पता चला कि वहा बनारस में था। इसी तरह सुभाष ठाकुर का खास व पचास हजार का इनामी मनीष सिंह भी बनारस में डीरेका का टेंडर में अपनी ताकत दिखाने आया था। माना जा रहा था कि मनीष सिंह को मुन्ना बजरंगी गैंग का साथ मिल गया था। कई दिनों तक बनारस रहने के बाद मनीष आराम से निकल गया और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। मनीष का टक्कर देने के लिए अभिषेक सिंह हनी भी मैदान में उतर चुका है दोनों ही चाहते हैं कि डीरेका में उनका वर्चस्व हो जाये। इसके लिए हवाई फायरिंग तक हो चुकी है और दोनों गुटों में गैंगवार से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
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टेंडर मिलते ही करोड़ों में खेलने लगते हैं माफिया
डीरेका का टेंडर मिलते ही माफिया गुट करोड़ों में खेलने लगते हैं। टेंडर के लिए कई हत्या हो चुकी है। टेंडर की सारी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाने के बाद भी माफिया व्यवस्था पर भारी पड़ते हैं। बदमाशों को सत्ता पक्ष का संरक्षण मिलता है इसलिए सरकार के साथ उनसे जुड़े माफिया का दखल घटता व बढ़ता रहता है। डीरेका के लिए जरायम की दुनिया में नया समीकरण बदलने लगा है। रेल इंजन बनाने के लिए प्रसिद्ध डीरेका से अब पीएम मोदी का भी नाम जुड़ गया है। ऐसे में पुलिस भी अब डीरेका के टेंडर को लेकर विशेष सतर्कता बतरने जा रही है।
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